बिहार में एक बार फिर बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। रोहतास और कैमूर जिले को जोड़ने वाला एक अहम पुल (छलका) अचानक धंस गया, जिससे दोनों जिलों के बीच का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। इस घटना से हजारों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार यह छलका कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड अंतर्गत सबार गांव के पूर्व दुर्गावती नदी पर बना हुआ था। दुर्गावती नदी ही कैमूर और रोहतास जिलों की प्राकृतिक सीमा मानी जाती है और इसी छलके के सहारे दोनों जिलों के लोगों का रोजाना आवागमन होता था।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस पुल का निर्माण करीब तीन साल पहले जिला परिषद मद से लगभग सात लाख रुपये की लागत से कराया गया था। निर्माण के समय इसकी निर्धारित मियाद पांच वर्ष बताई गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन साल के भीतर ही पुल धंसने लगा।
इस रास्ते से रामपुर प्रखंड के सबार, झाली, पांडेयपुर, बहेरी, बरली समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग रोहतास जिले के चेनारी बाजार आते-जाते हैं। चेनारी बाजार पर ही ग्रामीण अपनी कृषि उपज बेचने, घरेलू सामान व कपड़े खरीदने और इलाज जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए निर्भर रहते हैं।
पुल के धंसने से न सिर्फ ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियां भी ठप पड़ गई हैं। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत हो रही है, वहीं मरीजों और आम लोगों को वैकल्पिक और लंबे रास्तों से सफर करना पड़ रहा है।
घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने और जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था के साथ पुल की मरम्मत या नए निर्माण की मांग की है, ताकि रोहतास और कैमूर जिलों के लोगों का आवागमन फिर से सुरक्षित और सुचारु रूप से बहाल हो सके।

















