पटना। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक निजी विद्यालयों की मान्यता और संचालन को नियंत्रित करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है। यह कदम नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए उठाया गया है। नई एसओपी के तहत अब हर निजी स्कूल की मान्यता जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति द्वारा दी जाएगी। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी।प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी इस एसओपी में शिक्षकों की संख्या, बुनियादी सुविधाएं और शैक्षणिक मानकों को विस्तार से निर्धारित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है।कक्षा 1 से 5 तक के लिए शिक्षक अनुपात
- 60 छात्रों तक: 2 शिक्षक
- 61 से 90 छात्र: 3 शिक्षक
- 91 से 120 छात्र: 4 शिक्षक
- 121 से 200 छात्र: 5 शिक्षक
- 150 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में: 5 शिक्षक + 1 पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक अनिवार्य
- 200 से अधिक छात्रों की स्थिति में: छात्र-शिक्षक अनुपात (प्रधानाध्यापक को छोड़कर) 40:1 से अधिक नहीं होगा
कक्षा 6 से 8 तक के लिए नियम
- प्रत्येक कक्षा में कम से कम एक शिक्षक अनिवार्य
- विज्ञान एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षक जरूरी
- प्रत्येक 35 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था
- 100 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक अनिवार्य
- कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्य शिक्षा के लिए अंशकालिक शिक्षक रखना जरूरी
एसओपी में स्पष्ट निर्देश है कि हर शिक्षक के लिए कम से कम एक कक्षा कक्ष उपलब्ध हो और प्रधानाध्यापक के लिए अलग कार्यालय सह भंडार कक्ष होना चाहिए।बुनियादी सुविधाओं के कड़े नियमस्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई अनिवार्य प्रावधान किए गए हैं:
- स्कूल तक पहुंचने में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए
- लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय
- पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था
- मध्याह्न भोजन पकाने के लिए रसोईघर
- खेल का मैदान
- चारदीवारी
शैक्षणिक सत्र और शिक्षण घंटे
- कक्षा 1 से 5 तक: न्यूनतम 200 कार्य दिवस और 800 शिक्षण घंटे सालाना
- कक्षा 6 से 8 तक: न्यूनतम 220 कार्य दिवस और 1000 शिक्षण घंटे सालाना
- शिक्षकों के लिए प्रति सप्ताह 45 शिक्षण घंटे अनिवार्य
शिक्षा विभाग का कहना है कि ये नए नियम निजी स्कूलों में मनमानी को रोकेंगे और आरटीई अधिनियम के तहत कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराएंगे। मान्यता प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो स्कूलों का निरीक्षण करेगी।यह एसओपी सभी प्रारंभिक निजी विद्यालयों पर लागू होगी। विभाग ने स्कूल संचालकों को जल्द से जल्द इन मानकों का पालन करने का निर्देश दिया है। उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है।


















