अदालत के फैसले के बाद लालू परिवार में खुली कलह, रोहिणी आचार्य के इशारों ने बढ़ाई सियासी हलचल
नई दिल्ली/पटना।
दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत से आए एक अहम फैसले ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले में अदालत ने राजद सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके पुत्र तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, पुत्री मीसा भारती समेत सभी आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। कानूनी शिकंजा कसते ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, लेकिन असली भूचाल अदालत के बाहर, लालू परिवार के भीतर महसूस किया जा रहा है।
हार के बाद भीतर ही भीतर सुलग रही थी आग
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही यादव परिवार के भीतर असंतोष की आंच सुलग रही थी, जो अब खुलकर सामने आ गई है। अदालत के फैसले ने इस सुलगती आग को और भड़का दिया। पार्टी और परिवार—दोनों स्तरों पर खींचतान की चर्चाएं अब सार्वजनिक हो चुकी हैं।
रोहिणी आचार्य के बयान से बढ़ा विवाद
इस सियासी उथल-पुथल के बीच लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के हालिया बयान और सोशल मीडिया पोस्ट ने मामले को और गरमा दिया है। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिना किसी का नाम लिए इशारों-इशारों में तेजस्वी यादव और उनके करीबी संजय यादव पर निशाना साधा।
‘परायों से नहीं, अपनों से उजड़ती है विरासत’
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा—
“बड़ी विरासत को तहस-नहस करने के लिए परायों की ज़रूरत नहीं होती।
अपने और चंद षड्यंत्रकारी ‘नए बने अपने’ ही काफ़ी होते हैं।”
उनके शब्दों में गहरी पीड़ा के साथ-साथ तीखा सियासी तंज भी झलकता है। उन्होंने आगे लिखा—
“जब अहंकार सिर पर चढ़ जाता है और विवेक पर पर्दा पड़ जाता है,
तब विनाशक ही आंख-कान बन जाते हैं।”
इशारों में नेतृत्व पर सवाल
रोहिणी के इस बयान को राजद के भीतर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया पर सीधा सवाल माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर पारिवारिक असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कानूनी संकट के साथ राजनीतिक चुनौती
लैंड फॉर जॉब केस में आरोप तय होने के बाद लालू परिवार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक ओर कानूनी लड़ाई और दूसरी ओर पार्टी व परिवार की एकता बनाए रखने की जंग। विपक्ष इसे राजद की नैतिक हार बता रहा है, जबकि पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है।
अदालत के फैसले और परिवार के भीतर उभरते मतभेदों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में राजद की राजनीति केवल अदालत में ही नहीं, घर के अंदर भी कठिन इम्तिहान से गुजरने वाली है।

















