पटना।
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की वरिष्ठ नेत्री राबड़ी देवी आज अपना 67वां जन्मदिन मना रही हैं। 1 जनवरी को जन्मदिन के अवसर पर पटना स्थित उनके आवास पर समर्थक और कार्यकर्ता उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। हालांकि, इस बार उनके आवास के बाहर किसी प्रकार की बड़ी भीड़ देखने को नहीं मिल रही है।
दरअसल, फिलहाल राबड़ी देवी आवास पर अकेली मौजूद हैं। राजद सुप्रीमो और उनके पति लालू प्रसाद यादव दिल्ली में हैं, जहां उनका हाल ही में मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने परिवार के साथ विदेश दौरे पर हैं।
बिहार की राजनीति में राबड़ी देवी किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एक सामान्य गृहिणी से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर न केवल असाधारण है, बल्कि राज्य की राजनीति के इतिहास में एक अहम अध्याय भी माना जाता है।
राबड़ी देवी उस समय सुर्खियों में आईं जब चारा घोटाले के मामले में लालू प्रसाद यादव को जेल जाना पड़ा। सत्ता को बचाने के लिए लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। इसके साथ ही राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
राबड़ी देवी का जन्म एक संपन्न और प्रभावशाली परिवार में हुआ था। उनके पिता शिव प्रसाद चौधरी गोपालगंज जिले के सेलार कला गांव के बड़े जमींदार और सरकारी ठेकेदार थे। बताया जाता है कि उनके पास करीब 500 गाय-भैंसें थीं और इलाके में उनका परिवार बेहद समृद्ध माना जाता था। दो मंजिला हवेली जैसा मकान और सोने की परत चढ़े दरवाजे उनकी संपन्नता की पहचान थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राबड़ी देवी जब केवल 15 वर्ष की थीं, तभी उनके पिता ने उनके विवाह के लिए वर की तलाश शुरू कर दी थी। हालांकि राबड़ी देवी की शिक्षा पांचवीं कक्षा तक ही थी, लेकिन शिव प्रसाद चौधरी अपने लिए एक पढ़ा-लिखा, तेज-तर्रार और होनहार दामाद चाहते थे।
इसी दौरान छात्र राजनीति में उभर रहे लालू प्रसाद यादव से उनकी मुलाकात हुई। पटना में हुई बातचीत के दौरान लालू यादव की बेबाकी और राजनीतिक समझ से शिव प्रसाद चौधरी काफी प्रभावित हुए और उन्होंने उन्हें ही अपना दामाद चुन लिया। परिवार के कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद उन्होंने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए शादी तय कर दी।
शादी के बाद जैसे-जैसे लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक यात्रा आगे बढ़ी, राबड़ी देवी भी हर मोड़ पर उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। समय ने ऐसा मोड़ लिया कि राजनीति से दूर रहने वाली राबड़ी देवी एक दिन बिहार की सत्ता की बागडोर संभालती नजर आईं।

















