नई दिल्ली। नई दिल्ली की सियासी फ़िज़ा में रविवार को बजट भाषण के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकास और रणनीति का ऐसा खाका पेश किया, जिसमें विरासत और भविष्य दोनों की तैयारी नजर आई। संसद में उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य खादी और हस्तशिल्प टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत कर गांव, कारीगर और रोजगार को नई दिशा देना है। इस एलान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वदेशी उत्पादों के बढ़ावे से जोड़ा जा रहा है।

वित्त मंत्री ने बताया कि खादी और हस्तशिल्प सेक्टर को मजबूती देने के लिए
- टेक्सटाइल लेबर इंसेंटिव स्कीम और
- नेशनल हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स प्रोग्राम
की शुरुआत की जाएगी। साथ ही, “चैलेंज मोड” में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत खादी को केवल कपड़े तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे आत्मनिर्भर भारत की पहचान बनाया जाएगा।
एक और अहम रणनीतिक एलान रहा डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर। निर्मला सीतारमण ने बताया कि रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना नवंबर 2025 में शुरू की गई थी और अब ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को इस कॉरिडोर की स्थापना में मदद दी जाएगी। यह भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में भी बजट ने महत्वपूर्व घोषणाएं कीं। अगले पांच वर्षों में
- 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग,
- कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम, और
- सी-प्लेन वीजीएफ स्कीम
शुरू करने का ऐलान किया गया है, ताकि व्यापार को गति मिले और तटीय राज्यों की अर्थव्यवस्था मज़बूत हो।
शहरों के लिए नए इकनॉमिक जोन बनाने की भी घोषणा की गई। वित्त मंत्री ने बताया कि देश की आर्थिक सुधार गाड़ी सही पटरी पर है और सरकार इसे मजबूती से आगे बढ़ाएगी। इसके साथ ही उन्होंने भारत को आगे ले जाने के लिए छह चरणों वाली प्रक्रिया का जिक्र किया।

सबसे बड़ा स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़ा ऐलान रहा बायोफार्मा सेक्टर के लिए 5 वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये का आवंटन। सीतारमण ने कहा कि भारत को बायोफार्मा हब बनाया जाएगा, ताकि गंभीर बीमारियों की दवाएं आम लोगों तक सस्ते दामों पर पहुंच सकें।














