समस्तीपुर।
गांव-देहात से इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का आरोप है कि उन्हें सेहत नहीं, बल्कि खतरा परोसा जा रहा है। समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड स्थित नाजिरपुर स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्रामीणों का दावा है कि यहां मरीजों को एक्सपायरी दवाएं दी जा रही हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में भारी लापरवाही बरती जा रही है।

मामला तब उजागर हुआ जब कुछ मरीजों ने दवा के पैकेट पर दर्ज एक्सपायरी डेट पर ध्यान दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन दवाओं की मियाद काफी पहले खत्म हो चुकी है, वही दवाएं मरीजों को थमाई जा रही हैं। उनका कहना है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की जान के साथ खुला खिलवाड़ है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
आरोप केवल दवाओं तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाजिरपुर स्वास्थ्य केंद्र अपने निर्धारित समय पर नहीं खुलता। सुबह से ही बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी अस्पताल का दरवाजा नहीं खुलता। धूप, ठंड या बारिश—मरीजों की परेशानी की परवाह किसी को नहीं होती। अस्पताल का देर से खुलना यहां आम बात बन चुका है।
इसके साथ ही दवा वितरण के दौरान अवैध वसूली के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, जहां सरकारी नियमों के अनुसार पर्ची के लिए मात्र 2 रुपये शुल्क निर्धारित है, वहीं मरीजों से 5 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। आरोप है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों से खुलेआम अधिक पैसे लिए जा रहे हैं।
हालांकि, स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। डॉक्टर का कहना है कि एक्सपायरी दवाएं देने का आरोप पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है। उनके अनुसार, सभी दवाएं नियमानुसार जांच के बाद ही मरीजों को दी जाती हैं। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र के देर से खुलने और अतिरिक्त वसूली के आरोपों को भी नकारते हुए कहा कि केंद्र समय पर संचालित होता है और किसी प्रकार की अवैध वसूली नहीं की जाती।
फिलहाल, इस पूरे मामले से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं और ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि नाजिरपुर स्वास्थ्य केंद्र वास्तव में इलाज का भरोसेमंद ठिकाना है या फिर लापरवाही का केंद्र बन चुका है। सभी की निगाहें अब प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।















