भारतवर्ष में आज हिंदू नववर्ष 2026 यानी विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ हुआ। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाला यह नववर्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवचेतना का प्रतीक भी माना जाता है।
इसी के साथ आज से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो गई है, जिसके चलते सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने अपने घरों में पूजा-अर्चना कर नए वर्ष की शुरुआत की और सुख-समृद्धि की कामना की।
देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल हुए और सड़कों पर केसरिया ध्वज लहराते नजर आए। पूरे माहौल में उत्साह और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला।
इस मौके पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। देवी-देवताओं की झांकियां, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन के माध्यम से लोगों को सनातन परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया गया।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विक्रम संवत 2083 कई दृष्टियों से खास रहने वाला है। यह वर्ष नई ऊर्जा, सकारात्मक बदलाव और उन्नति का संकेत दे रहा है। व्यापार, शिक्षा और सामाजिक जीवन में नए अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।
देश के कई हिस्सों में आज गुड़ी पड़वा का पर्व भी धूमधाम से मनाया जा रहा है।
इस बार विक्रम संवत 2083 खास इसलिए भी है क्योंकि यह 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा। इसकी वजह अधिकमास है, जिसे इस बार ज्येष्ठ माह में जोड़ा गया है। यह अधिकमास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की विशेष पूजा का महत्व बढ़ जाता है, हालांकि विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से इस संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ रखा गया है, जिसमें बृहस्पति को राजा और मंगल को मंत्री का पद प्राप्त है।
हिंदू नववर्ष के इस शुभ अवसर पर पूरे देश में आस्था, उल्लास और नई उम्मीदों का माहौल बना हुआ है।














