बिहार से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत और सिस्टम दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वैशाली सदर अस्पताल के मुख्य गेट के पास रखे कचरे के ढेर से एक नवजात शिशु का शव बरामद हुआ है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक और भयावह दृश्य तब सामने आया, जब आवारा कुत्तों ने शव के एक पैर को नोच डाला। इस घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया और प्रशासन की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रोज़ की तरह सुबह सदर अस्पताल के गेट के पास चाय की दुकानों पर लोगों की भीड़ थी। इसी दौरान एक महिला बोरे में कुछ सामान लेकर आई और उसे कचरे के ढेर में फेंककर चली गई। कुछ ही देर बाद वहां आवारा कुत्ते पहुंचे और कचरे को उलट-पुलट करने लगे। तभी कुत्ते सड़क किनारे बैठकर किसी चीज़ को नोचते दिखे। लोगों की नजर पड़ी तो हड़कंप मच गया। जब कुत्तों को भगाया गया, तो सामने एक नवजात शिशु का शव पड़ा था, जिसका एक पैर बुरी तरह क्षत-विक्षत था।
घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित नगर थाना की पुलिस को मौके पर पहुंचने में करीब दो घंटे लग गए। इस दौरान सदर अस्पताल प्रशासन भी पूरी तरह नदारद रहा। मासूम का शव सड़क किनारे पड़ा रहा और कानून व्यवस्था की मौजूदगी सिर्फ कागज़ों तक सिमटी नजर आई।
स्थानीय दुकानदार राजा ने बताया कि उन्होंने खुद महिला को बोरे में कचरा लाकर फेंकते देखा था। उन्होंने कहा, “थोड़ी देर बाद कुत्ते कचरा खोदने लगे। जब हमने ध्यान दिया तो पता चला कि यह नवजात का शव है। हमने कुत्तों को भगाया और तुरंत पुलिस व अस्पताल प्रशासन को सूचना दी, लेकिन काफी देर तक कोई नहीं आया। आखिर में नगर परिषद की कचरा उठाने वाली टीम से शव हटवाया गया।”
यह कोई पहला मामला नहीं है। हाजीपुर सदर अस्पताल के आसपास इससे पहले भी कचरे में नवजात शिशुओं के शव मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। जिला प्रशासन भ्रूण हत्या और अवैध नर्सिंग होम्स पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। निजी नर्सिंग होम्स में अवैध गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
इस घटना ने कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं—उस मासूम का कसूर क्या था? उसे इस हाल में छोड़ने वाला कौन है? और कब तक इंसानियत को कचरे में फेंक दिया जाता रहेगा? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, हाजीपुर की सड़कों पर यह घटना एक खामोश लेकिन खून से लिखा सवाल बनकर घूमती रहेगी।

















