बिहार में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव को लेकर इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने फैसला लिया है कि इस वर्ष पंचायत चुनाव में पहली बार सभी पदों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
नई चिप तकनीक से सुरक्षित रहेगा हर वोट
इन EVM मशीनों में एक खास अतिरिक्त चिप लगाई गई है, जो हर डाले गए वोट को सुरक्षित रखेगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि EVM की मुख्य मेमोरी किसी कारणवश डिलीट भी हो जाए, तब भी इस अतिरिक्त चिप में वोटिंग का पूरा डेटा सुरक्षित रहेगा। यानी भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में वर्षों बाद भी वोटिंग का रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सभी छह पदों के लिए पहली बार EVM का उपयोग
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत वार्ड सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य—इन सभी पदों के लिए पहली बार EVM के जरिए मतदान कराया जाएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
ECIL को मिली EVM आपूर्ति की जिम्मेदारी
EVM मशीनों की आपूर्ति की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) को सौंपी गई है। जानकारी के अनुसार, मई के बाद मशीनों की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। मशीनों को सीधे जिलों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
जिलों को दिए गए निर्देश
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को EVM के सुरक्षित रखरखाव और उपयोग को लेकर आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।
पारदर्शिता और भरोसे पर जोर
नई तकनीक के जरिए चुनाव प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाने की कोशिश की जा रही है। हर चुनाव से पहले EVM की मुख्य मेमोरी डिलीट की जाएगी, लेकिन अतिरिक्त चिप में डेटा सुरक्षित रहने से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की स्थिति में जांच संभव होगी।
इस बदलाव को पंचायत चुनावों में एक बड़ी तकनीकी पहल माना जा रहा है, जो आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बना सकती है।















