बेगूसराय से सामने आई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी नाकामी का जीता-जागता सबूत है। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के वर्षों बाद भी अगर सरकारी स्कूलों के भीतर शराब की पेटियां छिपाई जा रही हैं, तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
मामला एक सरकारी स्कूल का है, जहां एक मासूम छात्र ने खेल-खेल में शौचालय के पास रखी शराब को कोई सामान्य पेय समझकर पी लिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह नशे की हालत में घर पहुंचा। परिजनों के होश उड़ गए। तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह सोचकर ही सिहरन होती है कि अगर समय पर इलाज नहीं मिलता, तो यह घटना जानलेवा भी हो सकती थी।
जब बच्चे ने होश में आने के बाद जो बताया, उसने पूरे इलाके को हिला दिया। स्कूल परिसर के बंद पड़े शौचालय में शराब की पेटियां छिपाकर रखी गई थीं। यह कोई छोटी मात्रा नहीं थी, बल्कि सुनियोजित तरीके से स्टॉक किया गया माल था। यानी स्कूल को तस्करों ने गोदाम में तब्दील कर दिया था।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या स्कूल प्रशासन पूरी तरह अनजान था?
या फिर यह सब उनकी जानकारी और सहमति से हो रहा था?
क्योंकि किसी भी स्कूल परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में शराब रखना बिना अंदरूनी मदद के संभव नहीं है। यह सिर्फ तस्करों का काम नहीं हो सकता, इसमें सिस्टम के भीतर की चुप्पी और संरक्षण भी शामिल हो सकता है।
पुलिस मौके पर पहुंची और करीब 25 पेटियां शराब जब्त कर ली गईं। लेकिन कार्रवाई सिर्फ जब्ती तक सीमित रहना इस गंभीर अपराध का समाधान नहीं है। असली सवाल है—
जिम्मेदार कौन है?
स्कूल के प्रधानाध्यापक, स्थानीय प्रशासन या फिर पुलिस की निगरानी?
यह घटना कई स्तरों पर फेल हुए सिस्टम को उजागर करती है:
- शराबबंदी कानून की साख पर सवाल: जब स्कूल तक सुरक्षित नहीं हैं, तो कानून का डर कहां है?
- शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल: जहां बच्चे पढ़ने जाते हैं, वहीं उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है।
- प्रशासनिक निगरानी पर सवाल: क्या नियमित जांच होती है या सब कागजों तक सीमित है?
स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। अभिभावकों का साफ कहना है कि अगर स्कूल ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो वे अपने बच्चों को कहां भेजें? यह सिर्फ एक स्कूल की बात नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल है।
अब जरूरत है कड़ी और दिखावटी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की:
- स्कूल प्रशासन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो
- दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो
- इलाके में सक्रिय शराब तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हो
- सभी सरकारी स्कूलों की तत्काल सुरक्षा जांच कराई जाए
अगर इस घटना के बाद भी सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संकेत होगा कि सिस्टम में कहीं न कहीं मिलीभगत है और बच्चों की सुरक्षा किसी की प्राथमिकता नहीं है।
यह खबर सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन को जगाने के लिए है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
अजय शास्त्री की रिपोर्ट















