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पटना में अंधेरे पर ‘जीरो टॉलरेंस’: 72 घंटे में स्ट्रीट लाइट दुरुस्ती का सख्त नियम

पटना में अब अंधेरे को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर की सड़कों, गलियों और मोहल्लों को पूरी तरह रोशन रखने के लिए नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को हाई-अलर्ट मोड पर डाल दिया है। नई व्यवस्था के तहत साफ निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायत आने पर अधिकतम 72 घंटे के भीतर उसका समाधान अनिवार्य होगा।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नगर निगम ने अपने सभी 19 जोनों में विशेष तकनीकी टीमें तैनात कर दी हैं। हर जोन में तीन-तीन प्रशिक्षित कर्मियों की टीम बनाई गई है, जो किसी भी खराबी की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर तुरंत मरम्मत करेगी। इन टीमों को मोबाइल वैन भी दी गई है, जिनमें जरूरी उपकरण—जैसे बल्ब, वायर, स्विच, सीढ़ी और सेफ्टी गियर—हमेशा उपलब्ध रहेंगे। इसका मकसद साफ है: खराबी की पहचान होते ही तुरंत सुधार, ताकि कहीं भी अंधेरा न रहे।

इसके अलावा, टीमों को नियमित पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखेंगे और खराब स्ट्रीट लाइट को बिना शिकायत के भी चिन्हित कर उसे ठीक करेंगे। वहीं कंट्रोल रूम में आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर 24 से 72 घंटे के भीतर निपटाने की सख्त व्यवस्था लागू की गई है।

आंकड़े भी इस व्यवस्था की सक्रियता को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 में टोल फ्री नंबर 155304 और व्हाट्सएप चैटबॉट 9264447449 पर कुल 11,899 शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनका शत-प्रतिशत समाधान किया गया। वहीं 2026 के शुरुआती महीनों में अब तक 3,263 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 1,806 का निपटारा हो चुका है। बाकी मामलों पर तेजी से काम जारी है।

फिलहाल नगर निगम क्षेत्र में करीब 83 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, जिनकी क्षमता 35 वाट से लेकर 140 वाट तक है। शहर के तेजी से बढ़ते विस्तार और आबादी को ध्यान में रखते हुए निगम ने 25 हजार नई स्ट्रीट लाइटें लगाने की भी योजना तैयार की है।

इतना ही नहीं, पूरी व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाने के लिए सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CCMS) विकसित किया जा रहा है। इसके लागू होने के बाद हर स्ट्रीट लाइट की रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी, जिससे खराबी का तुरंत पता लगाकर कार्रवाई की जा सकेगी।

गौरतलब है कि शहर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं है। बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड और पथ निर्माण विभाग जैसी एजेंसियां भी अपने-अपने प्रोजेक्ट्स के तहत लाइटिंग सिस्टम का संचालन और रखरखाव कर रही हैं।

कुल मिलाकर, पटना अब उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां अंधेरा समस्या है और रोशनी उसका तुरंत समाधान—वह भी तय समय सीमा, यानी 72 घंटे के भीतर।

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