कटिहार जिले के आजमनगर क्षेत्र के दनिहा पंचायत से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक मस्जिद से करीब 5 लाख रुपये की चोरी के मामले में दो नाबालिग बच्चों को जिम्मेदार ठहराया गया।
लेकिन इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय मामला पंचायत स्तर पर ही सुलझाने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने बच्चों को पुलिस के हवाले करने की बजाय पंचायत बुलाई और वहीं पर फैसला सुना दिया गया।
पंचायत में मौजूद मुखिया प्रतिनिधि सिकंदर भाट की मौजूदगी में यह तय किया गया कि दोनों बच्चों से लिखित में स्वीकारोक्ति ली जाए और उन्हें 3 मई तक पंचायत के माध्यम से मस्जिद कमेटी को 2 लाख रुपये लौटाने का निर्देश दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी गई।
मामला तब और गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर दोनों बच्चों के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद गांव में दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं—कुछ लोग इसे सजा और सबक बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अमानवीय और कानून के खिलाफ कार्रवाई कह रहे हैं।
इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पंचायतों को कानून अपने हाथ में लेकर इस तरह का फैसला करने का अधिकार है, खासकर जब मामला नाबालिगों से जुड़ा हो। क्या ऐसे फैसले न्याय व्यवस्था को कमजोर नहीं करते?
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। बारसोई अनुमंडल के डीएसपी अजय कुमार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला सिर्फ चोरी के आरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कानून, इंसाफ और मानवाधिकारों को लेकर एक गंभीर बहस का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
















