नई दिल्ली से आई एक अहम जलवायु चेतावनी में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि इस साल एल नीनो की स्थिति अपेक्षा से पहले विकसित हो सकती है। जहां पहले इसके अगस्त-सितंबर में बनने का अनुमान था, अब इसके मई से जुलाई के बीच सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है एल नीनो और क्यों है अहम
एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जो आमतौर पर हर 2 से 7 साल में होती है और 9 से 12 महीनों तक असर डालती है। इसके कारण समुद्री तापमान में बदलाव आता है, जिससे दुनिया भर के मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं—कहीं ज्यादा गर्मी, तो कहीं कम या ज्यादा बारिश देखने को मिलती है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, एल नीनो के सक्रिय होने से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का संकेत दे चुका है।
WMO के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो एल नीनो बनने का प्रमुख संकेत है।
बढ़ेगी गर्मी, घट सकती है बारिश
मई, जून और जुलाई के दौरान जमीन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना जताई गई है। यानी देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ सकती है। साथ ही मानसून के कमजोर होने से बारिश में कमी आने की आशंका भी है, जिसका असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर
इस बदलाव का प्रभाव सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते इस तरह के पूर्वानुमान मिलने से सरकार और आम लोगों को तैयारी करने का मौका मिलता है।














