बिहार सहित पूरे देश में महंगाई का असर अब हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी टकराव का असर अब विमानन क्षेत्र पर पड़ने लगा है। जेट ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के बाद एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी करने की घोषणा की है।
एयर इंडिया ने मंगलवार को बताया कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों पर किराए में बढ़ोतरी तीन चरणों में लागू की जाएगी। फिलहाल फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी को फेज-1 और फेज-2 के तहत लागू किया जा रहा है।
एयरलाइन के अनुसार, इस फैसले के बाद भारत के घरेलू रूट्स और सार्क देशों के लिए उड़ानों के टिकट करीब 399 रुपये तक महंगे हो सकते हैं। वहीं पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका जाने वाली उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज क्रमशः 10 डॉलर, 20 डॉलर और 30 डॉलर तक बढ़ा दिया गया है।
कंपनी का कहना है कि यह फैसला जेट ईंधन की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी के कारण लेना पड़ा है। एयर इंडिया के अनुसार मार्च 2026 की शुरुआत से ही एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जिससे एयरलाइंस के परिचालन खर्च में काफी वृद्धि हो गई है।
एयर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि वह यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त करती है, लेकिन बाहरी परिस्थितियों के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। एयरलाइन के मुताबिक यदि किराए में संशोधन नहीं किया जाता, तो कई उड़ानें व्यावसायिक रूप से घाटे में जा सकती हैं और उन्हें रद्द करने की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
हालांकि टाटा समूह की कम लागत वाली एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने फिलहाल अपनी उड़ानों पर कोई अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लागू नहीं करने का फैसला किया है। इससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा एटीएफ पर ही खर्च होता है। भारत में उच्च उत्पाद शुल्क और दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में एटीएफ पर लगने वाला वैट भी विमानन कंपनियों की लागत को और बढ़ा देता है।
दरअसल भारत अपनी जरूरत का पर्याप्त कच्चा तेल घरेलू स्तर पर उत्पादन नहीं करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय एयरलाइंस पर पड़ता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के युद्ध क्षेत्र में बदलने से इस इलाके के प्रमुख बंदरगाहों पर 750 से अधिक मालवाहक जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की करीब 50 प्रतिशत जरूरत अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है, जिसमें लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति कतर से होती है। ऐसे में मध्य पूर्व के हालात का असर भारत की ऊर्जा और विमानन लागत पर पड़ना तय माना जा रहा है।















