बीहट बाजार में 40 वर्षों के बाद अतिक्रमण का संकट फिर से उभरकर सामने आया है। स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों का कहना है कि पिछले कई दशकों से यह बाजार व्यवस्थित और व्यवधान मुक्त रहा, लेकिन अब कुछ असामाजिक तत्वों ने दुकानें, रास्ते और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बाजार की मुख्य सड़कें और फुटपाथ अब पूरी तरह से अतिक्रमण से प्रभावित हो रही हैं, जिससे न केवल यातायात की समस्या बढ़ी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और दुकानदारी पर भी असर पड़ा है। कई दुकानदारों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना अनुमति के दुकानें और स्टॉल लगा रहे हैं, जिससे व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों के लिए भी आवागमन मुश्किल हो गया है।
नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन ने अब तक केवल कागजी कार्रवाई की है, जबकि वास्तविक नियंत्रण में कमी बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई, तो बाजार का पर्यावरण और व्यावसायिक स्थिति प्रभावित होगी।
स्थानीय पुलिस और नगर परिषद ने मौके पर सर्वे और निरीक्षण शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस बार अतिक्रमण के मामलों में सख्ती बरती जाएगी और नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीहट बाजार की स्थिति एक सिस्टमेटिक समस्या की ओर इशारा करती है, जिसमें लंबे समय तक निगरानी और प्रशासनिक ध्यान न होने के कारण अतिक्रमण की समस्या जड़ पकड़ती गई।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की मांग है कि बाजार को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि आने वाले दशकों में फिर से इस तरह का अतिक्रमण और व्यवधान न हो।
अजय शास्त्री की रिपोर्ट

















