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बिहार में जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र के नियम बदले, अब आवेदन के लिए देने होंगे ज्यादा दस्तावेज

बिहार में जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने इन प्रमाण पत्रों को जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बना दिया है। नए नियम लागू होने के बाद अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने या शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन लेने के लिए इन प्रमाण पत्रों को बनवाना पहले की तुलना में थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के सर्विस प्लस (Service Plus) पोर्टल पर नए संशोधन लागू किए गए हैं। इसके तहत अब जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहले से अधिक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और गलत तरीके से प्रमाण पत्र बनवाने की घटनाओं को रोकना है।

जाति प्रमाण पत्र के लिए देने होंगे ये दस्तावेज

नए नियम के अनुसार जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय आवेदक को अपने या अपने पिता अथवा पूर्वजों से जुड़े प्रमाणित दस्तावेज देने होंगे। इसमें राजस्व अभिलेख यानी खतियान की फोटो कॉपी, दान पत्र की कॉपी, भूमि से संबंधित राजस्व दस्तावेज या भूमिहीनों को आवंटित जमीन से जुड़े कागजात शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा अन्य राजस्व अभिलेख भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाएंगे। यदि किसी कारणवश आवेदक के पास ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो प्रशासन द्वारा स्थल निरीक्षण के आधार पर भी आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। हालांकि आवेदन करते समय इन विकल्पों में से कम से कम एक दस्तावेज अपलोड करना जरूरी होगा।

आय प्रमाण पत्र के नियम भी हुए सख्त

आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। पहले सीमित दस्तावेजों के आधार पर ही आय प्रमाण पत्र बन जाता था, लेकिन अब आवेदक को अपनी आय से संबंधित अतिरिक्त प्रमाण देना अनिवार्य होगा।

नए नियम के तहत आवेदक वेतन पर्ची, पेंशन से संबंधित दस्तावेज, आयकर रिटर्न (ITR) या आय से जुड़े अन्य प्रमाण पत्र आवेदन के साथ अपलोड कर सकता है। इन दस्तावेजों में से कम से कम एक दस्तावेज देना जरूरी होगा, तभी आवेदन स्वीकार किया जाएगा।

आवासीय प्रमाण पत्र के लिए भी नए विकल्प

आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के नियमों में भी संशोधन किया गया है। अब आवेदक को अपने निवास से संबंधित अतिरिक्त दस्तावेज देने का विकल्प दिया गया है।

नए नियमों के तहत राजस्व अभिलेख का खतियान, दान पत्र की कॉपी, भूमि से जुड़े दस्तावेज, राशन कार्ड, निर्वाचन पहचान पत्र (वोटर आईडी) या बिजली बिल जैसे दस्तावेज आवेदन के साथ संलग्न किए जा सकते हैं।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया गया बदलाव

राज्य सरकार का कहना है कि इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य आवेदकों की जानकारी का सही सत्यापन करना और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

ऐसे में जो लोग आने वाले समय में जाति, आय या आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें आवेदन करते समय इन नए दस्तावेजों का विशेष ध्यान रखना होगा। यदि आवश्यक दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए तो उनका आवेदन खारिज भी किया जा सकता है।

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