बिहार में राज्यसभा चुनाव के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस के तीन विधायक मतदान से नदारद रहे, जिसके कारण महागठबंधन को बड़ा झटका लगा और राजद उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब मामला राजनीतिक से आगे बढ़कर जातीय समीकरणों तक पहुंचता नजर आ रहा है।
फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्होंने किसी दबाव या खरीद-फरोख्त के कारण नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच के आधार पर वोट नहीं दिया। उन्होंने साफ कहा, “हम लोग कोई सामान नहीं हैं कि हमें खरीदा जा सके, हमने स्वाभिमान के लिए फैसला लिया।”
विधायक ने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पार्टी ने नामांकन के एक दिन पहले ही प्रत्याशी की घोषणा की, जिससे विधायकों और कार्यकर्ताओं में असंतोष था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने को कहा था। इस बयान के बाद अब सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है और राजेश राम की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या प्रदेश नेतृत्व को पहले से इसकी जानकारी थी? क्या यह अंदरूनी साजिश थी? ऐसे कई सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
विधायक ने क्रॉस वोटिंग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर गद्दारी करनी होती तो वे क्रॉस वोटिंग करते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरणों की अनदेखी की गई, जिससे असंतोष और बढ़ा।
इस पूरे मामले के बाद कांग्रेस के भीतर विवाद गहराता जा रहा है, वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर हैं।














