बिहार में आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई रणनीति तैयार की जा रही है। राज्य के नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने संकेत दिया है कि उत्तर बिहार की बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए जमीनी हकीकत को समझना बेहद जरूरी है।
इसी क्रम में राज्यपाल जल्द ही उत्तर बिहार का दौरा करेंगे और प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेंगे।
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपदाओं से निपटने के लिए केवल कागजी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि तकनीक, संसाधन और जन-जागरूकता का समन्वय जरूरी है।
राज्यपाल ने विभागीय कार्यों की सराहना करते हुए आंतरिक समीक्षा (इंटरनल ऑडिट) और प्रोफेशनल अप्रोच अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपदाओं का सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ता है, इसलिए योजनाओं में इन वर्गों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि राज्यभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए और स्कूलों में आपदा प्रबंधन को पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट का उद्घाटन किया गया, जिससे डिजिटल माध्यम से सूचना प्रसार को और मजबूत किया जा सके।
विभागीय सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि बिहार में बाढ़, सूखा और अगलगी जैसी आपदाएं लगातार चुनौती बनी हुई हैं। वहीं नीतीश कुमार के उस संकल्प को भी दोहराया गया, जिसमें आपदा पीड़ितों को राज्य के खजाने पर पहला अधिकार बताया गया है।
विनय कुमार ने कहा कि आपदा के समय पहली प्रतिक्रिया पुलिस की होती है। राज्य में थानों को भूकंपरोधी बनाया जा रहा है और जवानों को आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बिहार अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए तकनीक, प्रशिक्षण और जनभागीदारी के जरिए एक आधुनिक और मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
















