बिहार विधानसभा में विधायकों की कार्यप्रणाली को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब विधायकों को हाजिरी देने के लिए सुबह 10 बजे सदन में शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होगा। वे घर या कार्यालय से ही ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।
शून्यकाल प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह बदलाव विधायकों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद किया गया है।
अब तक शून्यकाल की सूचना ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सचिव कक्ष में जाकर मंजूर कराई जाती थी। पहले इसकी समय-सीमा सुबह 9 बजे तक थी, जिसे बाद में 10 बजे किया गया।
अब ऑनलाइन भेज सकेंगे सूचना
नई व्यवस्था 23 फरवरी से लागू होगी। इसके तहत विधायक:
- शून्यकाल में उठाए जाने वाले मुद्दे अधिकतम 50 शब्दों में लिखेंगे
- यूनिकोड फॉन्ट में विषय तैयार करेंगे
- सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच नेवा पोर्टल (NEVA Portal) पर अपलोड करेंगे
- ‘सेंड’ बटन सक्रिय होते ही सूचना ऑनलाइन नोटिस के रूप में दर्ज हो जाएगी
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष की स्वीकृति मिलने पर ही संबंधित सूचना सदन में पढ़ी जाएगी।
विधायकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
नई प्रक्रिया को लेकर 19 से 21 फरवरी तक विधायकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि सभी सदस्य डिजिटल प्रणाली से परिचित हो सकें।
क्या है शून्यकाल?
शून्यकाल के दौरान विधायक लोक महत्व के तात्कालिक मुद्दे सदन में उठाते हैं। इन पर सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करे।
नई ऑनलाइन व्यवस्था से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध बनाने की उम्मीद है।
















