बिहार में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने भारी तबाही मचा दी है। राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक दो लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
प्रदेश के पटना, बेतिया, मोतिहारी, जमुई, औरंगाबाद, बगहा, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, नालंदा और खगड़िया समेत करीब 15 शहरों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। वहीं बगहा, मोतिहारी, बेगूसराय, खगड़िया और मुजफ्फरपुर में ओलावृष्टि से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
देर रात कई जिलों में भारी बारिश हुई, जिससे किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। खासकर गेहूं की फसल को भारी क्षति पहुंची है।
पटना के बाढ़ इलाके में आकाशीय बिजली गिरने से ताड़ के पेड़ में आग लग गई, हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं गया जिले के वजीरगंज और डुमरिया में वज्रपात की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान वजीरगंज के कोल्हना गांव निवासी मनोज सिंह (50) और डुमरिया के छकरबंधा थाना क्षेत्र निवासी महेंद्र यादव (55) के रूप में हुई है।
मौसम विभाग ने हालात को गंभीर मानते हुए दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा कटिहार, किशनगंज और अररिया में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जहां 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय ट्रफ लाइन मुख्य कारण हैं। दिन में बढ़ती गर्मी के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ रही है, जिससे आंधी-बारिश की स्थिति बन रही है।
पिछले 24 घंटों में सुबह मौसम सामान्य और धूप वाला रहा, लेकिन शाम होते-होते तेज आंधी और बारिश ने मौसम का रुख बदल दिया। कैमूर में अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 18 डिग्री सेल्सियस के साथ राजगीर सबसे ठंडा स्थान रहा।
मौसम विभाग के मुताबिक 21 मार्च को राज्य के अधिकतर हिस्सों में मौसम सक्रिय रहेगा, हालांकि 22 मार्च के बाद स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है।














