मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने कतर के तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर बड़ा हमला किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। इस हमले का सबसे बड़ा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर काफी हद तक निर्भर हैं।
बताया जा रहा है कि ईरान के मिसाइल हमलों में कतर की प्रमुख गैस सुविधा रास लफान रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके चलते कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नुकसान की भरपाई और मरम्मत में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है।
कतर एनर्जी के CEO साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि 18 और 19 मार्च 2026 को हुए हमलों में उत्पादन सुविधाओं को गंभीर क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के चलते कंपनी को कई दीर्घकालिक LNG अनुबंधों पर “फोर्स मेज्योर” लागू करना पड़ सकता है, यानी अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण सप्लाई बाधित हो सकती है।
भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंताजनक है, क्योंकि देश अपनी कुल LNG जरूरतों का लगभग 47 प्रतिशत आयात अकेले कतर से करता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में भारत ने करीब 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात किया, जिसमें से 11.30 MMT कतर से आया था।
इस आपूर्ति में कमी का सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गैस की उपलब्धता घटने से कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बिजली, उर्वरक और औद्योगिक उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है।
कतर के आधिकारिक बयान के अनुसार, हमले में LNG उत्पादन की दो प्रमुख इकाइयां—ट्रेन 4 और ट्रेन 6—क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनकी कुल उत्पादन क्षमता सालाना 12.8 मिलियन टन है, जो कतर के कुल LNG निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा है।
इस संकट का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देश भी कतर से LNG आयात करते हैं, ऐसे में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम न सिर्फ मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाता है, बल्कि दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी खड़ी कर रहा है। भारत के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वह ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्पों पर तेजी से काम करे।
















