मुजफ्फरपुर में इस बार मौसम का बदला मिजाज लीची उत्पादन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। बढ़ते तापमान के कारण लीची के पेड़ों में मंजर (फूल) की जगह नए पत्ते निकलने लगे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, चाइना और शाही जैसी प्रमुख लीची किस्मों के बागों में यह समस्या तेजी से देखने को मिल रही है। शाही लीची के बागों में लगभग 25 प्रतिशत और चाइना किस्म में करीब 50 प्रतिशत तक मंजर की जगह पत्ते निकल आए हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
कई इलाकों में बढ़ी समस्या
लीची उत्पादक किसान बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि मुशहरी, बंदरा, बोचहां, कांटी और मीनापुर क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि पिछले साल भी ऐसी स्थिति बनी थी, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ा था। इस बार भी वही हालात बनते दिख रहे हैं।
मौसम बदलाव का सीधा असर
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास के अनुसार, लीची के पेड़ों में अक्टूबर मध्य तक नई पत्तियों का निकलना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर अक्टूबर मध्य से दिसंबर मध्य के बीच पत्तियां निकलती हैं, तो यह उत्पादन के लिए नुकसानदेह होता है।
उन्होंने बताया कि लीची के बेहतर उत्पादन के लिए नवंबर मध्य से जनवरी मध्य तक करीब 60 दिन का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान न्यूनतम तापमान करीब 12 डिग्री और अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहना चाहिए।
25 साल में पहली बार ऐसी स्थिति
इस वर्ष नवंबर में तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री अधिक रहा, जबकि दिसंबर में भी लगभग 0.8 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में पहली बार इस तरह की स्थिति बनी है।
आम तौर पर इस समय पेड़ों में मंजर विकसित होते हैं, लेकिन तापमान अधिक रहने से पत्ते निकल आए हैं। इससे मंजर को मिलने वाले पोषक तत्व पत्तों में चले जाते हैं, जिससे फलन प्रभावित होता है।
किसानों के सामने संकट
इस बदलाव से लीची उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। अब किसान और विशेषज्ञ दोनों मौसम में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि आने वाले समय में उत्पादन पर ज्यादा असर न पड़े।

















