पटना। पटना हाईकोर्ट ने मोतिहारी शहर के मोतीझील को बुढ़ी गंडक नदी से जोड़ने वाली ब्रिटिशकालीन नहर पर हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण जलस्रोत और नहर से जुड़े मुद्दे पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि यह नहर मोतिहारी शहर के मोतीझील को बुढ़ी गंडक नदी के रामरेखा घाट, सिमरा से जोड़ती है, जिसकी लंबाई लगभग 11 किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि मोतीझील शहर की जीवनरेखा है, जिससे न केवल पेयजल की आपूर्ति होती है, बल्कि बाढ़ के समय यह नहर शहर को बचाने में भी अहम भूमिका निभाती है।
अधिवक्ता ने यह भी बताया कि 24 दिसंबर 2022 को तिरहुत कैनाल डिवीजन, मोतिहारी के कार्यपालक अभियंता ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस नहर को बाढ़ नियंत्रण और मोतीझील के जलस्तर को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था और विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
हालांकि, कई बैठकों के बावजूद अब तक कोई ठोस रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। इस वजह से मोतिहारी के लोगों को परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।















