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Patna University छात्रसंघ चुनाव 2026: एनएसयूआई का दबदबा, अध्यक्ष बने शांतनु शेखर, महासचिव पद पर खुशी कुमारी की जीत

पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (PUSU) 2026 के लिए शनिवार, 28 फरवरी को मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। इस बार कुल 37.84 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। मतदान के बाद देर रात तक चली मतगणना की प्रक्रिया में कुल 6 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद आधिकारिक परिणाम घोषित कर दिए गए।

एनएसयूआई का दबदबा, अन्य छात्र संगठनों को झटका

इस बार के चुनाव परिणामों में एनएसयूआई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रमुख पदों पर कब्जा जमा लिया। छात्र आरजेडी, छात्र जेडीयू और एबीवीपी को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है।

  • अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के शांतनु शेखर ने जीत दर्ज की।
    उन्हें कुल 2164 वोट मिले और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया।
  • महासचिव पद पर भी एनएसयूआई की उम्मीदवार खुशी कुमारी ने शानदार जीत हासिल की।
    अंतिम राउंड की गिनती तक उन्हें भी कुल 2164 वोट मिले और उन्होंने महासचिव पद अपने नाम किया।

छात्र राजनीति में इस जीत को एनएसयूआई के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में जश्न का माहौल देखने को मिला।


कॉलेजवार मतदान प्रतिशत

इस बार अलग-अलग कॉलेजों में मतदान प्रतिशत में काफी अंतर देखने को मिला। कुछ कॉलेजों में छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जबकि कुछ जगहों पर मतदान अपेक्षाकृत कम रहा।

  • पटना लॉ कॉलेज – 50.66%
  • पटना साइंस कॉलेज – 45.7%
  • पटना कॉलेज – 31.36%
  • बीएन कॉलेज – 21.2%
  • मगध महिला कॉलेज – 21.72%
  • पटना वीमेंस कॉलेज – 53.03%

सबसे अधिक मतदान पटना वीमेंस कॉलेज (53.03%) और पटना लॉ कॉलेज (50.66%) में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम मतदान बीएन कॉलेज (21.2%) में रहा।


6 राउंड की गिनती के बाद तस्वीर साफ

मतगणना की प्रक्रिया कुल छह चरणों में पूरी की गई। हर राउंड के बाद रुझान बदलते दिखे, लेकिन अंतिम राउंड तक आते-आते एनएसयूआई उम्मीदवारों की बढ़त निर्णायक साबित हुई। प्रशासन की ओर से मतगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण बताया गया।


छात्र राजनीति में नया समीकरण

इस परिणाम के बाद पटना विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में नया समीकरण बनता नजर आ रहा है। एनएसयूआई की जीत को संगठन के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, जबकि अन्य छात्र संगठनों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

अब सभी की नजर नई कार्यकारिणी के कामकाज पर रहेगी कि वे छात्रों के मुद्दों—शैक्षणिक सुविधाएं, परीक्षा व्यवस्था, छात्रावास और रोजगार से जुड़े विषयों—पर किस तरह काम करते हैं।

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