बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद नया सियासी संकट खड़ा हो गया है। ढाका से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) विधायक फैसल रहमान के मतदान नहीं करने के फैसले ने पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति में ला दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव चाहकर भी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे हैं।
दरअसल, यह मामला सिर्फ पार्टी अनुशासन का नहीं बल्कि संवैधानिक गणित से भी जुड़ा हुआ है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए कम से कम 10 प्रतिशत यानी 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में अगर RJD अपने किसी विधायक पर कार्रवाई करता है और संख्या घटती है, तो तेजस्वी यादव की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल सार्वजनिक तौर पर इस पूरे मामले के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को जिम्मेदार ठहरा रहा है, लेकिन अंदरखाने स्थिति काफी पेचीदा बनी हुई है। पार्टी अनुशासन और राजनीतिक संतुलन के बीच तालमेल बिठाना RJD के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
इस बीच राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। RJD के उम्मीदवार एडी सिंह को अपेक्षित 41 वोट नहीं मिल सके। जानकारी के अनुसार, RJD के एक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने मतदान नहीं किया, जिससे पूरा समीकरण बिगड़ गया।
इस घटनाक्रम ने RJD की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पार्टी को अपने विधायकों को साथ बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर अनुशासनहीनता पर नरमी बरतना भविष्य में और बड़े संकट को जन्म दे सकता है।
फिलहाल तेजस्वी यादव के सामने “कुर्सी बचाएं या सख्ती दिखाएं” जैसी स्थिति बन गई है, जहां हर फैसला राजनीतिक जोखिम से भरा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि RJD इस संकट से कैसे निकलती है और क्या पार्टी अपनी सियासी पकड़ को बनाए रख पाती है।














