बिहार पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बिहार के सहरसा जिले में एक मामले में निर्दोष लोगों को फंसाने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की गई है।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला कनरिया थाना क्षेत्र का है। जहां एक प्राथमिकी में नामों में कथित फेरबदल कर कुछ लोगों को गलत तरीके से आरोपी बनाया गया।
जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी की रात सरस्वती पूजा के मौके पर दह बाजार में बिना अनुमति ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस मामले में 27 जनवरी को 16 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
जांच में हुआ खुलासा
मामले की जांच के दौरान आरोप लगा कि जांच अधिकारी और चौकीदारों ने नामों में बदलाव कर निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश की।
पीड़ित ने इस मामले की शिकायत डीआईजी के जनता दरबार में की, जिसके बाद जांच कराई गई। जांच अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सिमरी बख्तियारपुर मुकेश कुमार ठाकुर द्वारा की गई, जिसमें पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई।
डीआईजी की बड़ी कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने कड़ी कार्रवाई करते हुए:
- दारोगा अनिल प्रसाद
- चौकीदार अनिल कुमार
- चौकीदार दर्शन
इन तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
साथ ही सभी को पुलिस केंद्र स्थानांतरित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश भी दिया गया है।
सख्त निर्देश जारी
डीआईजी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
जांच जारी
फिलहाल मामले में विभागीय कार्रवाई जारी है और पुलिस विभाग इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है।
यह घटना एक बार फिर कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है, साथ ही निष्पक्ष जांच की जरूरत को भी उजागर करती है।
















