अगर आप ट्रैफिक चालान को हल्के में लेकर “बाद में देख लेंगे” की सोच रखते हैं, तो अब संभल जाइए। केंद्र सरकार मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ट्रैफिक नियमों को और ज्यादा सख्त करने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन तैयार कर लिया है, जिस पर सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों से सुझाव मांगे गए हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना वाहन चालकों को भारी पड़ सकता है।
ड्राफ्ट के मुताबिक, अब ट्रैफिक उल्लंघन होने पर चालान की प्रक्रिया और ज्यादा तेज और पारदर्शी होगी। ट्रैफिक नियम तोड़ते ही 15 दिनों के भीतर चालान सीधे वाहन मालिक के पते पर भेजा जाएगा, जबकि ई-चालान की स्थिति में यह 3 दिनों के अंदर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया जाएगा। चालान मिलने के बाद वाहन मालिक या चालक को 45 दिनों का समय दिया जाएगा। इस अवधि में या तो चालान की पूरी राशि जमा करनी होगी या फिर जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर चालान को चुनौती देनी होगी। तय समय सीमा के भीतर अगर न भुगतान किया गया और न ही आपत्ति दर्ज की गई, तो चालान को स्वतः स्वीकार कर लिया जाएगा।
नए नियमों का सबसे सख्त प्रावधान बकाया चालान रखने वाले वाहन चालकों के लिए रखा गया है। ड्राफ्ट के अनुसार, तय समय में चालान नहीं भरने पर वाहन और ड्राइविंग लाइसेंस को “नॉट टू बी ट्रांजैक्टेड” श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि आरटीओ से जुड़ी कोई भी सेवा तब तक नहीं मिलेगी, जब तक चालान का भुगतान नहीं कर दिया जाता। वाहन की आरसी का नवीनीकरण नहीं हो सकेगा, ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यू या अपडेट नहीं होगा और न ही पता परिवर्तन, ट्रांसफर या अन्य प्रशासनिक सेवाएं मिल पाएंगी।
इसके अलावा, बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सरकार और भी सख्ती दिखाने के मूड में है। यदि कोई चालक तीन महीने तक चालान की राशि जमा नहीं करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। वहीं, यदि किसी चालक के खिलाफ एक ही साल में तीन या उससे अधिक बार रेड लाइट जंप करने, ओवरस्पीडिंग या खतरनाक ड्राइविंग जैसे गंभीर उल्लंघनों में चालान कटता है, तो कम से कम तीन महीने के लिए उसका लाइसेंस जब्त किया जा सकता है।
सरकार के इस कदम के पीछे की वजह भी आंकड़ों से साफ हो जाती है। फिलहाल देशभर में ट्रैफिक चालानों की वसूली बेहद कम है। औसतन सिर्फ 40 फीसदी चालान की ही रिकवरी हो पाती है। राजधानी दिल्ली में यह आंकड़ा महज 14 फीसदी है, जबकि कर्नाटक में 24 फीसदी, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में लगभग 27 फीसदी चालानों की ही वसूली हो पाती है। साल 2021 में जहां करीब 67 लाख चालान काटे गए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 1.36 करोड़ तक पहुंच गई, लेकिन इसके बावजूद कुल वसूली केवल 105 करोड़ रुपये के आसपास ही रही।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गलत या तकनीकी कारणों से कटे चालानों के खिलाफ वाहन चालकों को पूरा अधिकार मिलेगा। ड्राफ्ट नियमों के तहत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज की जा सकेगी। यदि संबंधित अथॉरिटी 30 दिनों के भीतर आपत्ति पर फैसला नहीं लेती है, तो चालान अपने आप अमान्य मान लिया जाएगा।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार अब ट्रैफिक नियमों के पालन को सिर्फ अपील और जागरूकता तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे सख्ती से लागू करने के मूड में है। सरकार का साफ संदेश है कि ट्रैफिक चालान को नजरअंदाज करने की आदत अब भारी पड़ेगी। नियम तोड़े गए और चालान नहीं भरा गया, तो न सिर्फ सड़क पर बल्कि सिस्टम के भीतर भी आपकी गाड़ी और लाइसेंस फंस सकता है।















