कोलकाता | राजनीतिक रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर होता नजर आ रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बाहर करने के लिए एक नया और बड़ा विपक्षी मोर्चा आकार लेने लगा है। टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ के बैनर तले माकपा (CPI-M), इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) और एआईएमआईएम (AIMIM) जैसी पार्टियों को एक मंच पर लाने की पहल शुरू कर दी है। इस प्रस्तावित गठबंधन का मकसद साफ है—ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करना और भाजपा को बहुमत से रोकना।

हुमायूं कबीर की रणनीति और शर्तें
हुमायूं कबीर ने गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं की पुष्टि करते हुए कहा है कि 25 फरवरी तक तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। उन्होंने गठबंधन के नेतृत्व को लेकर एक अहम शर्त रखी है। हुमायूं कबीर के अनुसार, यदि यह विपक्षी मोर्चा बनता है तो उसका नेतृत्व माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ही करेंगे।
सीटों को लेकर भी उन्होंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि गठबंधन अस्तित्व में आता है तो वे 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन यदि बात नहीं बनती है तो उनकी पार्टी 182 सीटों पर अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी।

लेफ्ट और कांग्रेस के बीच बढ़ती खटास
इस नए संभावित गठबंधन की सुगबुगाहट ने पुराने सहयोगियों के बीच दरार और गहरी कर दी है। माकपा सचिव मोहम्मद सलीम द्वारा हुमायूं कबीर के साथ बैठक करने पर लेफ्ट खेमे के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है।
वहीं दूसरी ओर, माकपा ने कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए टीएमसी से साठगांठ का आरोप लगाया है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि लेफ्ट और कांग्रेस के रिश्ते पहले से ज्यादा तल्ख हो चुके हैं।

ISF का बदला रुख, सीटों पर मोलभाव तेज
इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) ने भी इस बदले सियासी समीकरण में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव में 32 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली ISF अब 50 सीटों की मांग कर रही है।
लेफ्ट के अन्य घटक दलों द्वारा सीटें छोड़ने में आनाकानी के चलते, विधायक नौशाद सिद्दीकी की पार्टी अब हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी के साथ हाथ मिलाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
AIMIM से संपर्क, लेफ्ट में मंथन
इस संभावित गठबंधन में सबसे चौंकाने वाला पहलू असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का नाम जुड़ना है। माकपा ने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी से संपर्क किया है। सोलंकी ने बातचीत के लिए सकारात्मक रुख दिखाया है और चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
हालांकि माकपा के भीतर इस कदम को लेकर अब भी संशय है, लेकिन पार्टी के एक धड़े का मानना है कि टीएमसी और भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट करने के लिए यह रणनीति अहम साबित हो सकती है।
टीएमसी का पलटवार
विपक्ष की इस संभावित गोलबंदी पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि आज माकपा की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है।
उन्होंने विपक्षी दलों की कोशिशों की तुलना ‘दर-दर भीख मांगने’ से करते हुए कहा कि हार के डर से ये पार्टियां एक-दूसरे का सहारा ढूंढ रही हैं। अरूप चक्रवर्ती ने दावा किया कि जनता पूरी तरह ममता बनर्जी के साथ है और यह गठबंधन सिर्फ राजनीतिक हताशा का नतीजा है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए सियासी समीकरण बनते दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह प्रस्तावित विपक्षी मोर्चा वास्तव में जमीन पर उतरता है या फिर अंदरूनी मतभेदों में उलझकर बिखर जाता है।














