मुजफ्फरपुर।
बिहार में उस वक्त अफरा-तफरी और खौफ का माहौल बन गया, जब एक स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं अचानक एक-एक कर बेहोश होकर गिरने लगीं। क्लासरूम में चीख-पुकार मच गई, गलियारों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और मासूम चेहरों पर डर साफ नजर आने लगा। किसी ने इसे अचानक फैली बीमारी माना तो किसी ने इसे किसी अदृश्य साये का असर बता दिया।
पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड अंतर्गत मुरा हरलोचनपुर पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय रायपुर का है। बुधवार को स्कूल परिसर में अचानक कई छात्राएं एक के बाद एक बेहोश हो गईं, जिससे पूरे विद्यालय का माहौल पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शिक्षक भी घबरा गए और छात्र सहम गए। आनन-फानन में बेहोश हुई छात्राओं को उनके-उनके घर भेज दिया गया। स्कूल प्रशासन भी किसी ठोस कारण की जानकारी देने की बजाय सिर्फ हालात संभालने में जुटा नजर आया।
घर पहुंचने के बाद परिजनों की प्रतिक्रिया दो हिस्सों में बंटी हुई दिखी। कुछ समझदार परिजन छात्राओं को तत्काल डॉक्टर के पास ले गए, जहां जांच और प्राथमिक इलाज कराया गया। वहीं दूसरी ओर कई परिवार आज भी अंधविश्वास की गिरफ्त में नजर आए। कहीं झाड़-फूंक कराई गई, तो कहीं ओझा-गुनी को बुला लिया गया, मानो यह कोई बीमारी नहीं बल्कि किसी रहस्यमयी साये का असर हो।
इस विरोधाभासी स्थिति ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल के आसपास कुछ दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। वे स्कूल के पास ही मवेशी बांधते हैं, जिससे इलाके में गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि इसी गंदे और जहरीले माहौल के कारण पहले भी बच्चों के बेहोश होने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद न तो स्कूल परिसर की साफ-सफाई कराई गई और न ही अवैध कब्जा हटाने की कोई ठोस कार्रवाई हुई। अब जब छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी है, तब भी जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि 21वीं सदी में, जब विज्ञान और चिकित्सा इतनी आगे बढ़ चुकी है, तब भी लोग झाड़-फूंक और टोना-टोटका जैसे अंधविश्वास के रास्ते क्यों चुन रहे हैं? यह मामला सिर्फ छात्राओं के बेहोश होने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी और समाज की सोच पर भी करारा सवाल खड़ा करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले को लेकर कोई ठोस और स्थायी कदम उठाते हैं या फिर यह घटना भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।














