पटना। बिहार की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की बहुचर्चित समृद्धि यात्रा का 26 मार्च को पटना में समापन हो रहा है। इस यात्रा ने पूरे राज्य में सियासी हलचल तेज कर दी है और इसे सिर्फ विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत दिखाने के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है।
नालंदा में 810 करोड़ की योजनाओं की सौगात
समृद्धि यात्रा के पांचवें और अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने Nalanda में कई बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
- दीपनगर स्टेडियम में करीब 810 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी
- स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एलआईसी भवन से सोगरा कॉलेज मोड़ तक बने फ्लाईओवर का लोकार्पण
- कोसुक गांव के पास पंचाने नदी रिवर फ्रंट परियोजना का निरीक्षण
पटना में मेगा कार्यक्रम
दोपहर में पटना पहुंचकर मुख्यमंत्री:
- 583 करोड़ रुपये की 612 योजनाओं का शिलान्यास
- 473 करोड़ रुपये की 761 योजनाओं का उद्घाटन
इसके बाद Bapu Sabhagar में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां विकास कार्यों की समीक्षा और जनता से सीधा संवाद किया जाएगा।
विकास या सियासी शक्ति प्रदर्शन?
समृद्धि यात्रा को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह केवल विकास योजनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति भी है।
इस यात्रा के जरिए सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
क्या यह “फेयरवेल यात्रा” है?
सबसे बड़ी चर्चा यही है कि क्या यह Nitish Kumar की मुख्यमंत्री के तौर पर आखिरी यात्रा हो सकती है।
- वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं
- अटकलें हैं कि वे जल्द ही सीएम पद छोड़ सकते हैं
अगर ऐसा होता है, तो समृद्धि यात्रा उनके कार्यकाल का “फेयरवेल शो” भी मानी जा सकती है।
समृद्धि यात्रा अब सिर्फ विकास तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत भी दे रही है। हर कार्यक्रम, हर घोषणा और हर मंच के पीछे एक गहरा सियासी संदेश छिपा नजर आ रहा है, जो आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।














