पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को अपनी चर्चित ‘समृद्धि यात्रा’ को विराम दे दिया है। अब वह अगले सप्ताह से दिल्ली जाने की तैयारी में जुटेंगे। दरअसल, नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और उन्हें अगले महीने की 10 तारीख तक राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेनी है।
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले पांच दिनों के भीतर विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसे पूरा करना अनिवार्य है। हालांकि इस्तीफा देने के बाद भी नई व्यवस्था होने तक वह मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं और अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।
गुरुवार को मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा नालंदा और पटना में आयोजित हुई। इसके बाद अब उनके आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी लगभग तय हो गई है। शुक्रवार को वह रामनवमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वहीं शनिवार से जदयू के भीतर बैठकों का दौर शुरू हो जाएगा।
सबसे पहले जदयू की प्रदेश इकाई की बैठक आयोजित होगी, जिसमें पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। यह बैठक मुख्यमंत्री आवास या जदयू के प्रदेश कार्यालय में हो सकती है। इसके बाद पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें नई सरकार के गठन को लेकर अहम चर्चा की जाएगी। इस बैठक में सरकार के स्वरूप के साथ-साथ विभिन्न पदों पर दावेदारी को लेकर भी विचार-विमर्श होगा। बताया जा रहा है कि इस बार जदयू विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी अपनी दावेदारी पेश कर सकता है।
इसी बीच एक और बड़ी चर्चा यह है कि क्या नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इस पर फैसला अगले चार से पांच दिनों में हो सकता है। इसके बाद एनडीए की बैठक आयोजित होगी, जिसमें बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बिहार में नई सरकार का गठन 14 अप्रैल के बाद ही हो सकता है। माना जा रहा है कि खरमास समाप्त होने के बाद ही नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण कराया जाएगा। तब तक नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाले रखेंगे।
कुल मिलाकर, बिहार में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और सभी की नजरें अब एनडीए की बैठक और नए मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई हैं।
राहुल कुमार की रिपोर्ट
















