पटना: राजधानी पटना को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले महात्मा गांधी सेतु पर गुरुवार की सुबह एक बार फिर भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुबह के समय वाहनों का दबाव बढ़ने से सेतु पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और हजारों वाहन करीब तीन घंटे तक जाम में फंसे रहे। इससे पटना और हाजीपुर के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुबह-सुबह थम गई यातायात की रफ्तार
गुरुवार सुबह गांधी सेतु पर अचानक वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण लंबा जाम लग गया। देखते ही देखते कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। बस, ट्रक, पिकअप, ऑटो और निजी वाहन धीरे-धीरे रेंगते नजर आए।
जाम के कारण कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के छात्र, मरीज और अन्य यात्री घंटों फंसे रहे। दोनों ओर वाहनों का दबाव बढ़ने से पूरा सेतु जाम की चपेट में आ गया।
ट्रक और पिकअप की टक्कर से बढ़ी परेशानी
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब जाम के बीच एक ट्रक और पिकअप वाहन की आपस में टक्कर हो गई। दुर्घटना में पिकअप चालक घायल हो गया।
हादसे के बाद कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल चालक को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
जाम की सूचना मिलते ही यातायात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गए। विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई और वाहनों को व्यवस्थित तरीके से निकालने का प्रयास शुरू किया गया।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। हालांकि तब तक हजारों लोग घंटों तक जाम में फंसे रह चुके थे।
जेपी सेतु का उपयोग करने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि गांधी सेतु पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए वैकल्पिक मार्ग के रूप में Jay Prakash Narayan Setu (जेपी सेतु) का उपयोग करें।
अधिकारियों का कहना है कि सुबह और शाम के समय गांधी सेतु पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है।
प्रशासन के लिए बनी चुनौती
महात्मा गांधी सेतु पर बार-बार लगने वाला जाम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उत्तर बिहार और राजधानी पटना के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, इसलिए यहां यातायात का दबाव लगातार बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक प्रबंधन को और प्रभावी बनाने तथा वैकल्पिक मार्गों के उपयोग को बढ़ावा देने से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।





















