नई दिल्ली। भारत में खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। एक तरफ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट कुछ और ही तस्वीर पेश करती है।
केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने वर्ष 2024-25 में कुल 1.70 लाख खाद्य सैंपल की जांच की, जिनमें से 17.6% सैंपल फेल हो गए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि दूध के 38% सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति
‘Global Food Security Index’ के अनुसार भारत खाद्य गुणवत्ता के मामले में दुनिया में 80वें स्थान पर है। जबकि Canada पहले और United States दूसरे स्थान पर हैं।
सिस्टम कैसे काम करता है?
भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बंटी होती है।
- FSSAI मानक तय करता है
- जिला स्तर पर डेजिग्नेटेड ऑफिसर (DO) निगरानी करते हैं
- फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) सैंपल जांचते हैं
मिलावट रोकने में 4 बड़ी चुनौतियां
1. खुले में खाद्य पदार्थों की बिक्री
भारत में करीब 70% खाद्य उत्पाद खुले (लूज) में बिकते हैं।
- 70% दूध
- 65% मसाले
खुले में बिकने से ट्रैकिंग और निगरानी मुश्किल हो जाती है, जबकि अमेरिका में 99% दूध पैक में बिकता है।
2. सेल्फ-डिक्लेरेशन सिस्टम
कई बार कंपनियां लैब रिपोर्ट आने से पहले ही उत्पाद बाजार में उतार देती हैं।
जापान जैसे देशों में बिना टेस्ट रिपोर्ट के डेयरी उत्पाद बेचना संभव नहीं है।
3. अधिकारियों की भारी कमी
- DO के 16% पद खाली
- FSO के 35% पद खाली
देश में सिर्फ 2,623 FSO के मुकाबले करीब 58 लाख फर्म हैं।
भारत में एक अधिकारी पर औसतन 2200 फर्म हैं, जबकि कनाडा में सिर्फ 50।
4. कमजोर लैब नेटवर्क
भारत में केवल 252 फूड टेस्टिंग लैब हैं।
यहां औसतन 62 लाख लोगों पर एक लैब है, जबकि कनाडा में 30 लाख लोगों पर एक लैब उपलब्ध है।
दूसरे देशों से क्या सीख सकता है भारत?
- कनाडा: हर साल 300 प्रोडक्ट बाजार से वापस लिए जाते हैं, सभी का डिजिटल रिकॉर्ड होता है
- अमेरिका: किसी खाद्य पदार्थ से एक व्यक्ति बीमार हुआ तो 24 घंटे में उत्पाद हटाना अनिवार्य
- चीन: मिलावट पर उम्रकैद या फांसी तक की सजा
- नॉर्वे: गोदामों में सेंसर आधारित निगरानी, तापमान गड़बड़ होते ही बैच रिजेक्ट
- आयरलैंड: हर पशु का ‘ईयर टैग’ और दूध की पूरी ट्रेसिंग
- नीदरलैंड्स: खेती से पहले मिट्टी का डीएनए टेस्ट, संदूषण पर फसल नष्ट
बढ़ती चिंता, जरूरी सुधार
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त कानून, बेहतर निगरानी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ही मिलावटखोरी पर लगाम लगाई जा सकती है।
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या न सिर्फ लोगों की सेहत बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकती है।














