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विश्वास मत पर NDA की जीत, सम्राट चौधरी सरकार की स्थिरता पर लगी मुहर

Bihar Politics: बिहार विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में शुक्रवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया। दिनभर चली बहस और हंगामे के बाद यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया। खास बात यह रही कि विपक्ष ने मत विभाजन की मांग नहीं की, जिससे एनडीए सरकार ने बिना औपचारिक वोटिंग के ही अपना बहुमत साबित कर दिया।

सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के नेतृत्व में विपक्ष ने सरकार पर कई मुद्दों को लेकर हमला बोला। आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के बीच कई बार सदन में हंगामे की स्थिति भी बनी रही। हालांकि, अंतिम चरण में विपक्ष ने वोटिंग की मांग नहीं उठाई, जिससे सत्ता पक्ष को राजनीतिक तौर पर बढ़त मिल गई।

विश्वास मत पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों पर जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में गठबंधन सरकारें बनना कोई नई बात नहीं है और वर्तमान व्यवस्था भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों—खासकर उम्र और शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठे सवालों—को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार के विकास एजेंडे को भी विस्तार से रखा। उन्होंने घोषणा की कि राज्य के हर प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज खोलने की योजना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही 11 नए टाउनशिप विकसित करने की योजना को भी राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।

प्रशासनिक सुधारों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसी प्रणाली विकसित करेगी, जिसके तहत थाना, प्रखंड और अंचल स्तर की गतिविधियों की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

अपने भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में नीतीश कुमार के अनुभव और मार्गदर्शन की अहम भूमिका रही है।

कुल मिलाकर, यह विश्वास मत केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि इसने बिहार की मौजूदा सरकार की स्थिरता और राजनीतिक मजबूती का स्पष्ट संदेश दिया। विपक्ष के विरोध के बावजूद एनडीए सरकार ने यह दिखा दिया कि वह न केवल सदन में बहुमत रखती है, बल्कि अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

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