भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के किशनगंज और अररिया जिलों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई को राज्य की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, इन सेंटरों में अवैध तरीके से पैसे लेकर आधार कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग बांग्लादेशी घुसपैठियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए किया जा रहा था।
किशनगंज में किराना दुकान की आड़ में चल रहा था खेल
किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत बलुआ जागीर में एक किराना दुकान पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने पूरे रैकेट का खुलासा किया। मौके से लैपटॉप, मॉनिटर, प्रिंटर, नकली मोहर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।
इस कार्रवाई में मनोहर कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह किराना दुकान की आड़ में दूसरों के रजिस्ट्रेशन का दुरुपयोग कर फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार करता था।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मंगलेश कुमार सिंह ने बताया कि छापेमारी के दौरान करीब 400 फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा साजिद रब्बानी को भी गिरफ्तार किया गया है, जो प्रिंटिंग प्रेस के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाने और क्लोन बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट बेचने का संगठित नेटवर्क चला रहा था।
अररिया में साइबर थाना की कार्रवाई, फोटोस्टेट दुकान से गिरफ्तारी
इसी कड़ी में अररिया साइबर थाना पुलिस ने नेपाल सीमा से सटे फारबिसगंज बाजार स्थित ज्योति कॉम्प्लेक्स में छापेमारी की। यहां सोनू फोटोस्टेट नामक दुकान में अवैध दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे।
पुलिस ने मौके से मोहसिन आलम (38) को गिरफ्तार किया और उसके पास से लैपटॉप सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। तलाशी के दौरान 53 पन्नों में आधार अपडेशन और कार्ड निर्माण से जुड़े दस्तावेज मिले, जिन पर एनरोलमेंट ऑपरेटर का नाम साईनाथ कृष्णा करमारे दर्ज था।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी पैसों के लालच में विदेशी घुसपैठियों के लिए फर्जी पहचान तैयार कर रहे थे। यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है।
पुलिस की सख्ती से टूटा नेटवर्क
इस संयुक्त कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि सीमा क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच कर रही है, जिससे पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
किशनगंज और अररिया में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ पुलिस की बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।















