नई दिल्ली/पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली में बिहार बीजेपी की कोर कमेटी की अहम बैठक, जो Vinod Tawde के आवास पर शुक्रवार शाम 6 बजे होने वाली थी, अचानक रद्द कर दी गई। इस फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल और तेज कर दी है।
बैठक में Nitish Kumar और Samrat Choudhary सहित बिहार बीजेपी और सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की चर्चा थी। माना जा रहा था कि इस दौरान आगामी चुनाव, संगठनात्मक रणनीति और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा होनी थी।
लेकिन ऐन वक्त पर बैठक रद्द होने और दोनों शीर्ष नेताओं के अचानक पटना लौटने के फैसले ने सियासी समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर किसी बड़े फैसले को लेकर रणनीति में बदलाव किया गया है।
जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा शनिवार तक प्रस्तावित था, लेकिन दोनों नेताओं ने कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर शुक्रवार शाम पटना लौटने का फैसला किया। राजनीतिक जानकार इसे सामान्य घटनाक्रम नहीं मान रहे हैं और इसे बड़े सियासी घटनाक्रम की आहट के रूप में देख रहे हैं।
इधर, बिहार में नई सरकार के गठन और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं और सम्राट चौधरी की बढ़ती सक्रियता के बीच नए मुख्यमंत्री को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
दिल्ली से पटना तक के इस घटनाक्रम का असर राजभवन और सचिवालय की गतिविधियों में भी देखने को मिल रहा है। दोनों नेताओं के लौटने की खबर के बाद प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी भी पक्ष ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 24 से 48 घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। क्या सत्ता समीकरण बदलेंगे, क्या कैबिनेट में बड़ा फेरबदल होगा—इन सभी सवालों के जवाब जल्द सामने आ सकते हैं।
फिलहाल, पूरे बिहार की नजरें मुख्यमंत्री आवास ‘1-अणे मार्ग’ पर टिकी हुई हैं, जहां से किसी भी वक्त बड़ा सियासी फैसला सामने आ सकता है।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट















