Bihar Health: पश्चिम चम्पारण जिले के बगहा अनुमंडलीय अस्पताल से सामने आया एक वीडियो पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऑपरेशन थिएटर के भीतर एक सिक्योरिटी गार्ड द्वारा घायल मरीज को टांके लगाए जाने की घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्यभर में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब शास्त्रीनगर स्थित रूबी गैस एजेंसी के पास टेंपो और पिकअप वैन के बीच जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में कई लोग घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल लाया गया। अचानक बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों के पहुंचने से अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इसी दौरान वायरल वीडियो में देखा गया कि एक गंभीर घायल मरीज का इलाज डॉक्टर या प्रशिक्षित स्टाफ के बजाय एक सुरक्षा गार्ड कर रहा है। यह दृश्य स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करता है और आम लोगों के मन में डर पैदा करता है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीज वास्तव में सुरक्षित हैं।
घायल पिकअप चालक वसीम अख्तर और सुरेंद्र पासी (उत्तर प्रदेश निवासी) ने आरोप लगाया कि उनके घावों पर टांके भी गार्ड द्वारा लगाए गए। हालांकि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर डॉ. रामप्रवेश भारती ने सफाई देते हुए कहा कि मरीजों की हालत गंभीर थी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें रेफर किया जा सकता था।
वहीं अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि अस्पताल में लंबे समय से ओटी असिस्टेंट और ड्रेसर के पद खाली हैं। स्टाफ की भारी कमी के कारण जीएनएम और अन्य कर्मियों की मदद ली जा रही है। उनका यह भी कहना है कि गार्ड ने डॉक्टर की निगरानी में सिर्फ सहयोग किया, स्वतंत्र रूप से कोई इलाज नहीं किया।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। अस्पताल में अव्यवस्था और लापरवाही पहले भी सामने आ चुकी है, लेकिन इस बार वीडियो वायरल होने के बाद मामला खुलकर सामने आया है।
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। जांच की बात जरूर कही जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—जब ऑपरेशन थिएटर में गार्ड इलाज करने लगें, तो मरीजों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है?


















