बिहार में आयुष्मान भारत योजना का तेजी से विस्तार हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि राज्य इस योजना के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।
उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में 4.16 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे बिहार देश में तीसरे स्थान पर है। वहीं 32 लाख से अधिक मरीजों का इलाज इस योजना के तहत किया जा चुका है, जिस पर कुल 4,784 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
पटना में आयोजित ‘आयुष्मान मंथन’ कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बताया कि राज्य के 1,230 अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं। यह कार्यक्रम एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (ADRI) और बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में करीब 1,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसमें डॉक्टर, अस्पताल संचालक, मेडिकल कॉलेज प्रतिनिधि और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल थे। कार्यशालाओं के माध्यम से 92 प्रतिशत निजी सूचीबद्ध अस्पतालों को प्रशिक्षण दिया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सके।
इस दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को सम्मानित भी किया गया। एम्स पटना को पहला स्थान, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) को दूसरा, इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) को तीसरा और लोकनायक जयप्रकाश हड्डी अस्पताल (LNJP) को चौथा स्थान मिला।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि योजना की सफलता के लिए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी और अस्पतालों के बीच मजबूत समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।


















