बिहार की सियासत में एक बार फिर इंसानियत, संवेदना और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुज़ुर्गों के हित में एक बड़ा और मानवीय फैसला लेते हुए राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे इलाज की सुविधा देने का ऐलान किया है। इस पहल से उम्रदराज़ लोगों को अब छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
शनिवार सुबह सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना सात निश्चय पार्ट-3 के तहत सातवें संकल्प ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ को धरातल पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम है। इस योजना के तहत बुज़ुर्गों को उनके घर पर ही पैथोलॉजी जांच, ब्लड प्रेशर, ईसीजी, फिजियोथेरेपी जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा आपात स्थिति में डॉक्टर घर पर पहुंचकर इलाज करेंगे और जरूरत पड़ने पर नर्सिंग सहायता भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार का मकसद केवल सत्ता में बने रहना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग—खासतौर पर बुज़ुर्गों—की जिंदगी को सुरक्षित, आसान और सम्मानजनक बनाना है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2005 से उनकी सरकार “न्याय के साथ विकास” के सिद्धांत पर चलते हुए गरीब, वंचित और कमजोर तबकों के लिए लगातार काम कर रही है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 से 2030 के बीच बिहार को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की कतार में खड़ा करना है। इसी विज़न को ध्यान में रखते हुए सात निश्चय-3 लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को कम करना और उन्हें बेहतर जीवन सुविधाएं प्रदान करना है।
स्वास्थ्य विभाग को इस योजना को तेजी, पारदर्शिता और ईमानदारी से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बुज़ुर्गों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को और बेहतर बनाने के लिए समाज से आने वाले नए सुझावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह पहल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और सुकून की गारंटी है। नीतीश कुमार सरकार ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि बिहार में शासन का मतलब सिर्फ़ हुकूमत नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और जिम्मेदारी है।















