पटना। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा कर्मचारियों के प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने को लेकर जारी नए आदेश पर विवाद खड़ा हो गया है। उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha के विभाग के इस फैसले से कर्मचारियों में असंतोष देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है।
क्या है नया आदेश
विभागीय पत्र के अनुसार:
- कोई भी कर्मचारी अपने पूरे सेवा काल में सिर्फ एक बार ही प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकेगा
- यह अनुमति केवल उच्च वेतन स्तर (Higher Pay Level) वाली नौकरी के लिए ही मिलेगी
- एक से अधिक बार परीक्षा देने के लिए कर्मचारी को नौकरी से इस्तीफा देना होगा
सरकार का तर्क
विभाग का कहना है कि बार-बार परीक्षा देने से:
- सरकारी कामकाज प्रभावित होता है
- समय और संसाधनों की बर्बादी होती है
- विभागीय कार्यों के निष्पादन में बाधा आती है
इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्त नियम लागू किया गया है।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ऐसे फैसलों के जरिए अधिकारियों और कर्मचारियों की स्वतंत्रता सीमित करना चाहती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि:
- क्या कोई दरोगा आगे बढ़कर आईपीएस नहीं बन सकता?
- क्या कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का अधिकार नहीं है?
‘मौलिक अधिकारों का हनन’ का आरोप
कांग्रेस ने इस आदेश को कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया है और कहा है कि इस तरह के फैसले प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए लाए जा रहे हैं।
बढ़ सकती है सियासी बहस
इस आदेश के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। एक तरफ सरकार इसे प्रशासनिक दक्षता से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला बता रहा है।
बिहार सरकार का यह फैसला प्रशासनिक सुधार के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन इससे कर्मचारियों के अधिकार और करियर ग्रोथ पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध के बीच अपने फैसले पर कायम रहती है या इसमें कोई बदलाव करती है।















