पटना। बिहार में लागू शराबबंदी कानून को 10 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध शराब का कारोबार लगातार जारी है। हाल ही में मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की मौत के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शराबबंदी कानून को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि 10 साल बाद भी यह कानून अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि शराबबंदी की विफलता के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि शराबबंदी के बावजूद बिहार में बड़े स्तर पर अवैध शराब का कारोबार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन और शराब माफिया के बीच गठजोड़ के कारण यह कानून प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि शराबबंदी लागू होने के बाद अब तक 11 लाख से ज्यादा केस दर्ज किए गए हैं और 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 5 करोड़ लीटर से ज्यादा शराब बरामद की गई है।
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शराब की जब्ती में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह साफ होता है कि राज्य में अवैध शराब की उपलब्धता बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के कारण अन्य नशे का कारोबार भी बढ़ा है और युवा वर्ग गांजा, ब्राउन शुगर और नशीली दवाओं की ओर बढ़ रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि शराबबंदी कानून के तहत ज्यादातर कार्रवाई गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों पर होती है, जबकि बड़े तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह केवल जब्ती के आंकड़े ही नहीं, बल्कि वास्तविक खपत के आंकड़े भी सार्वजनिक करे और यह बताए कि राज्य में अवैध शराब की सप्लाई कैसे हो रही है।
फिलहाल, शराबबंदी कानून को लेकर राज्य में सियासत तेज हो गई है और सरकार पर इस कानून की प्रभावशीलता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।















