बिहार विधानसभा में शिक्षकों के आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) से जुड़ा मामला शुक्रवार को जोर-शोर से उठा। सदन में यह मुद्दा रखा गया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत यदि कोई शिक्षक आकस्मिक अवकाश लेता है और उस अवधि के बीच रविवार पड़ता है, तो उसे भी अवकाश में जोड़ दिया जाता है। इससे शिक्षकों के निर्धारित अवकाश दिवस कम हो जाते हैं।
क्या है पूरा मामला?
सदस्यों ने कहा कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल की मौजूदा प्रणाली में तकनीकी खामी के कारण आकस्मिक अवकाश के बीच आने वाले रविवार और अन्य राजकीय अवकाश स्वतः ही छुट्टी में जुड़ जाते हैं।
विधायकों का कहना था कि यह व्यवस्था शिक्षकों के हित के खिलाफ है और इससे उनके वैध अवकाश का नुकसान होता है। कई सदस्यों ने इसे अनुचित बताते हुए तत्काल संशोधन की मांग की।
सदन में हुआ हंगामा
इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के सदस्य एक साथ नजर आए। शिक्षकों के हित का हवाला देते हुए सदन में जोरदार बवाल हुआ। सदस्यों ने मांग की कि:
- आकस्मिक अवकाश के दौरान पड़ने वाले रविवार को छुट्टी में शामिल न किया जाए
- अन्य राजकीय अवकाश भी अवकाश गणना से बाहर हों
- ई-शिक्षा कोष पोर्टल में तत्काल तकनीकी सुधार किया जाए
शिक्षा मंत्री का आश्वासन
हंगामे के बीच शिक्षा मंत्री ने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि आकस्मिक अवकाश के दौरान रविवार को जोड़ना गलत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि अब आकस्मिक अवकाश की अवधि में पड़ने वाले रविवार और अन्य राजकीय अवकाश को छुट्टी की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए ई-शिक्षा कोष प्रणाली में आवश्यक तकनीकी संशोधन किए जाएंगे।
शिक्षकों को मिलेगी राहत
सरकार के इस स्पष्ट आश्वासन के बाद राज्य के लाखों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से यह मुद्दा शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। अब तकनीकी सुधार के बाद शिक्षकों को अपने आकस्मिक अवकाश का पूरा लाभ मिल सकेगा।
















