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बिहार में भूकम्प तैयारी की बड़ी कवायद, राज्य स्तरीय “टेबल टॉप अभ्यास” आयोजित

भूकम्प जैसे कुदरती कहर से निपटने की तैयारी को लेकर बिहार में हाई-लेवल हलचल देखी गई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली के सहयोग से बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में राज्य स्तरीय भूकम्प परिदृश्य पर आधारित दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत “टेबल टॉप अभ्यास” आयोजित किया गया।

यह अभ्यास महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि संभावित तबाही से पहले इम्तिहान-ए-तैयारी था।

23 जिलों की सक्रिय भागीदारी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गंगा के उत्तर स्थित 21 जिलों सहित पटना और मुंगेर समेत कुल 23 जिलों ने भागीदारी की।

अभ्यास में शामिल प्रमुख एजेंसियां:

  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)
  • SDRF
  • सिविल डिफेंस
  • बिहार अग्निशमन सेवा
  • गृह, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, जल संसाधन विभाग
  • दानापुर रेलवे मंडल
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
  • सशस्त्र सीमा बल (SSB)
  • केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
  • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
1934 के भूकम्प जैसा सिमुलेशन

अभ्यास में 1934 के ऐतिहासिक भूकम्प की तर्ज पर भयावह परिदृश्य का सिमुलेशन किया गया—

  • बहुमंजिला इमारतों का मलबे में तब्दील होना
  • आगजनी
  • रेल और सड़क संपर्क ठप
  • औद्योगिक हादसे
  • संभावित बाढ़ का खतरा

जिला प्रशासन को इंसिडेंट कमांड सिस्टम (ICS) के तहत ऑपरेशन, लॉजिस्टिक्स और वित्त प्रबंधन की रिहर्सल कराई गई।

गोल्डन आवर पर खास फोकस

अभ्यास में “गोल्डन आवर” के महत्व को रेखांकित किया गया।

  • कम्युनिटी फर्स्ट रिस्पॉन्स
  • सैटेलाइट फोन और हैम रेडियो जैसे वैकल्पिक संचार माध्यम
  • ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी से रियल-टाइम आकलन
  • राहत शिविरों की पूर्व तैयारी
  • मनोसामाजिक परामर्श

इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा और समीक्षा की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने की। वहीं NDMA के लीड कंसल्टेंट मेजर जनरल सुधीर बहल ने जिलों की आपदा प्रतिक्रिया योजनाओं, संसाधनों की उपलब्धता, त्वरित संचार तंत्र और एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम पर गहन समीक्षा प्रस्तुत की।

सवाल-जवाब के दौर में जिलों से मिले फीडबैक का बारीकी से विश्लेषण किया गया और कमियों की पहचान की गई।

26 फरवरी 2026 की मॉक ड्रिल की तैयारी

अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी सरकार की सामूहिक जवाबदेही है।

यह अभ्यास 26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल की मजबूत बुनियाद साबित होगा।

संदेश साफ है —
“आज की तैयारी, कल की तबाही को कम करती है।”

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