चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ हुआ आस्था और श्रद्धा का महापर्व चैती छठ आज अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। सप्तमी तिथि को व्रती उगते सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य अर्पित कर “उषा अर्घ्य” देंगे और इसी के साथ 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत पूर्ण होगा।
छठ पर्व भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना का अनुपम पर्व है, जिसे वर्ष में दो बार मनाया जाता है—एक बार कार्तिक मास में और दूसरी बार चैत्र मास में। यह पर्व शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक माना जाता है।
इससे पहले मंगलवार, 24 मार्च को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य अर्पित किया। सूर्यास्त का समय शाम 06:34 बजे रहा। इस दौरान श्रद्धालु नदी, तालाब, सरोवर और घाटों पर कमर तक जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हुए उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। बांस की सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल, कसार, केला समेत विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
आज यानी 25 मार्च 2026 को उषा अर्घ्य दिया जाएगा। पंचांग के अनुसार सूर्योदय का समय सुबह 06:20 बजे है। वहीं राजधानी पटना में सूर्योदय सुबह 05:59 बजे होगा। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करेंगे।
उषा अर्घ्य के बाद व्रती पारण करते हैं, जिसमें प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। कई श्रद्धालु घर के आंगन या छत पर पानी से भरे पात्र में खड़े होकर भी अर्घ्य देते हैं।
इस प्रकार चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व आज श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ संपन्न हो जाएगा।


















