Dariapur (सारण)। सारण जिले के दरियापुर प्रखंड में बाल श्रम की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उस उम्र में कई मासूम बच्चे मजदूरी कर अपने और अपने परिवार के भरण-पोषण में जुटे हैं।
प्रखंड के चाय दुकानों, होटलों, गैरेज, ईंट भट्ठों और निर्माण कार्यों में ऐसे बच्चों की मौजूदगी आम होती जा रही है। बावजूद इसके इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
चौक-चौराहों से गांव तक दिख रहे बाल श्रमिक
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रखंड के चौक-चौराहों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बाल श्रमिक आसानी से देखे जा सकते हैं। कई बच्चे होटलों और चाय दुकानों में बर्तन धोते नजर आते हैं, तो कुछ मोटर गैरेज और साइकिल मरम्मत की दुकानों में काम करते दिखाई देते हैं।
इसके अलावा ईंट भट्ठों और मकान निर्माण कार्यों में भी नाबालिग बच्चे मजदूरों के साथ हेल्पर के रूप में काम करते देखे जा सकते हैं।
पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा असर
बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। जिन हाथों में किताब-कॉपी होनी चाहिए, वे हाथ आज कठिन मेहनत करने को मजबूर हैं।
कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय दिनभर मजदूरी कर अपने परिवार की आर्थिक मदद करने में लगे रहते हैं।
गरीबी और जागरूकता की कमी मुख्य कारण
स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीबी और जागरूकता की कमी के कारण कई अभिभावक भी बच्चों को मजदूरी करने से नहीं रोकते। तुरंत मिलने वाली मजदूरी के लालच में कई परिवार अपने बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा देते हैं।
चाय दुकानों, होटलों, गैरेज, ईंट भट्ठों और कोल्ड स्टोरेज जैसे छोटे प्रतिष्ठानों में इन बच्चों से सस्ती मजदूरी पर काम कराया जाता है। कई जगहों पर बच्चों को केवल खाना और मामूली पैसे देकर पूरे दिन काम लिया जाता है।
कानून के बावजूद जारी है बाल श्रम
बाल श्रम रोकने के लिए सरकार की ओर से Child Labour (Prohibition and Regulation) Amendment Act 2016 जैसे सख्त कानून बनाए गए हैं और समय-समय पर प्रशासनिक निर्देश भी जारी किए जाते हैं।
इसके बावजूद दरियापुर क्षेत्र में बाल श्रमिकों की संख्या में कमी नहीं आ रही है, जिससे बच्चों का बचपन धीरे-धीरे मजदूरी की भेंट चढ़ता जा रहा है।
















