नई दिल्ली/श्रीनगर: केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के पारित होने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर चुनावी सीमाओं (Delimitation) में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यदि यह प्रक्रिया लागू होती है, तो 1947 के बाद छठी बार और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद दूसरी बार परिसीमन किया जाएगा।
पहले भी हो चुका है बदलाव
साल 2022 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर जम्मू-कश्मीर में 7 नई विधानसभा सीटें जोड़ी गई थीं। इसके बाद कुल सीटों की संख्या में बदलाव आया था। अब एक बार फिर परिसीमन होने की संभावना से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
मौजूदा विधानसभा सीटों की स्थिति
वर्तमान में Jammu and Kashmir में कुल 114 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें:
- 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के लिए आरक्षित हैं (इन पर चुनाव नहीं होता)
- बाकी 90 सीटों पर चुनाव होते हैं
इन 90 सीटों का क्षेत्रवार वितरण:
- कश्मीर प्रांत: 47 सीटें
- जम्मू प्रांत: 43 सीटें
पूर्ववर्ती राज्य की स्थिति
जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन से पहले:
- कुल 111 विधानसभा सीटें थीं
- इनमें से 24 सीटें PoJK के लिए आरक्षित थीं
- शेष सीटों में:
- 46 सीटें कश्मीर प्रांत में
- 37 सीटें जम्मू प्रांत में
- 4 सीटें लद्दाख क्षेत्र में
क्या होगा असर?
नए परिसीमन के बाद:
- सीटों की संख्या और सीमाओं में बदलाव संभव
- क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है
- आने वाले चुनावों में नए समीकरण बन सकते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर की राजनीति और प्रतिनिधित्व पर लंबे समय तक प्रभाव डाल सकती है।















