बिहार की सियासत में एक नया अध्याय खुलता दिखाई दे रहा है। रविवार को मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने औपचारिक रूप से Janata Dal (United) का दामन थाम लिया। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में दूसरी पीढ़ी की एंट्री और तेज हो गई है। इस कदम के साथ नीतीश कुमार बिहार के उन मुख्यमंत्रियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिनके बेटे ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि बिहार की राजनीति अब धीरे-धीरे नई पीढ़ी के नेताओं के हाथों में जाती दिख रही है। पहले से ही Tejashwi Yadav के नेतृत्व में Rashtriya Janata Dal और Chirag Paswan की अगुआई में Lok Janshakti Party (Ram Vilas) दूसरी पीढ़ी की राजनीति का चेहरा बन चुके हैं। अब जदयू में निशांत कुमार की एंट्री ने इस सिलसिले को और मजबूती दे दी है।
परिवारवाद पर तंज और अब बेटे की एंट्री
दिलचस्प बात यह है कि खुद नीतीश कुमार लंबे समय से परिवारवाद की राजनीति पर सवाल उठाते रहे हैं। वे अक्सर Lalu Prasad Yadav और Rabri Devi के परिवार पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन अब जब उनके बेटे ने राजनीति में कदम रखा है, तो विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सवाल भी उठा रहा है और तंज भी कस रहा है।
सादगी और आध्यात्मिक रुझान के लिए जाने जाते हैं निशांत
निशांत कुमार ने अपने पिता की तरह इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अब तक वे सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहे हैं और सादगी व आध्यात्मिक रुझान के लिए जाने जाते रहे हैं। उन्होंने विवाह भी नहीं किया है और लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखी थी। लेकिन जदयू की सदस्यता लेने के बाद यह माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की भूमिका निभा सकते हैं।
बिहार में राजनीतिक विरासत का पुराना सिलसिला
बिहार की राजनीति में राजनीतिक विरासत का सिलसिला नया नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री Karpoori Thakur के बेटे Ramnath Thakur सक्रिय राजनीति में हैं। वहीं Jitan Ram Manjhi के बेटे Santosh Kumar Suman भी राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं।
इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री Jagannath Mishra के बेटे Nitish Mishra और Bhagwat Jha Azad के बेटे Kirti Azad भी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले चेहरों में शामिल रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री Ram Sundar Das के बेटे Sanjay Kumar Das विधायक बने, लेकिन राजनीति में बड़ी छाप नहीं छोड़ पाए।
इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Daroga Prasad Rai के बेटे Chandrika Rai भी पहले राजद और बाद में जदयू से जुड़े रहे हैं।
क्या पिता जैसा मुकाम बना पाएंगे निशांत?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निशांत कुमार भी बिहार की राजनीति में वही मुकाम हासिल कर पाएंगे जो उनके पिता ने बनाया है, या फिर उन्हें लंबी राजनीतिक परीक्षा से गुजरना पड़ेगा। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में “वारिसों की दस्तक” ने बहस और हलचल दोनों तेज कर दी है।

















