बिहार में पुलिस लाइनों में “दीदी जीविका रसोइया” व्यवस्था लागू करने की घोषणा के बाद इसका असर अब प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंच गया है। सम्राट चौधरी द्वारा सभी पुलिस लाइनों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी देने के फैसले के बाद राजगीर स्थित राजगीर पुलिस अकादमी में विरोध के स्वर उभर आए हैं।
भोजन का बहिष्कार
सूत्रों के अनुसार, अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे करीब 1600 पीटीसी सिपाहियों और 69 डीएसपी प्रशिक्षुओं ने मंगलवार को जीविका दीदी रसोइया व्यवस्था के तहत परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता और प्रबंधन को लेकर आपत्ति जताई। विरोध स्वरूप सभी प्रशिक्षुओं ने सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण करना बंद कर दिया।
बताया जा रहा है कि ये सभी प्रशिक्षु 18 जनवरी से अकादमी में ट्रेनिंग ले रहे हैं। अचानक बदली भोजन व्यवस्था के बाद से ही असंतोष की स्थिति बनी हुई थी, जो अब खुलकर सामने आ गई है।
क्या है आपत्ति?
प्रशिक्षुओं का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और समयबद्धता में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक अकादमी प्रशासन या गृह विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अंदरखाने अधिकारियों द्वारा स्थिति को संभालने और प्रशिक्षुओं को समझाने की कोशिश जारी है।
सरकार की मंशा
गौरतलब है कि “जीविका दीदी रसोइया” योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को पुलिस लाइनों और अन्य सरकारी संस्थानों में भोजन प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी जानी है। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
प्रशासन के सामने चुनौती
हालांकि, राजगीर पुलिस अकादमी में सामने आया यह विरोध सरकार और प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन सकता है। प्रशिक्षण संस्थानों में अनुशासन और नियमित दिनचर्या बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में भोजन जैसी मूलभूत व्यवस्था को लेकर असंतोष प्रशिक्षण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल अकादमी प्रशासन और संबंधित विभाग मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में जुटे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस व्यवस्था में सुधार करती है या प्रशिक्षुओं की मांगों के अनुरूप कोई वैकल्पिक समाधान निकालती है।














