शेखपुरा जिले में पिछले सप्ताह आई तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी और तैयार फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
कृषि विभाग ने इस नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। जिला कृषि पदाधिकारी सुजाता कुमारी ने बताया कि फसलों की क्षति का सही आकलन करने के लिए कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों की टीमों को अलग-अलग प्रखंडों में लगाया गया है। कई क्षेत्रों से रिपोर्ट मिलनी शुरू हो गई है।
हालांकि, अब तक आई शुरुआती रिपोर्ट में कहीं भी न्यूनतम 33 प्रतिशत क्षति दर्ज नहीं की गई है। सरकारी नियमों के अनुसार, किसानों को मुआवजा या राहत पाने के लिए कम से कम 33 प्रतिशत फसल नुकसान होना जरूरी है। ऐसे में फिलहाल किसानों को राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों से किसानों ने बताया कि आंधी और बारिश से खासकर प्याज और दलहन की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। टाल क्षेत्र के बड़े किसान और कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष शिव शंकर प्रसाद के अनुसार, तेज आंधी के कारण प्याज के पौधे टूटकर गिर गए, जिससे फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई। इसके अलावा मसूर, मटर और खेसारी की तैयार फसल को भी नुकसान पहुंचा है।
कई इलाकों में तेज हवा के कारण मक्का की फसल भी बर्बाद हो गई है। किसान राजेंद्र महतो ने बताया कि बारिश के कारण प्याज की फसल सड़ने लगी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं किसान यूनियन के नेता सुरेश प्रसाद ने प्रशासन से मांग की है कि फसलों के नुकसान का सही और निष्पक्ष आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत दी जाए।
फिलहाल कृषि विभाग की टीम लगातार सर्वे में जुटी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि कितनी क्षति हुई है और किन किसानों को राहत मिल पाएगी।















