बिहार का वैशाली जिला, जो पहले टॉपर घोटाले और डिग्री स्कैम के कारण सुर्खियों में रहा है, एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में है। हाजीपुर स्थित इंदू देवी रंजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज और डॉ. रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज में जांच के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच में खुली गड़बड़ियों की परत
डीएम वर्षा सिंह के निर्देश पर गठित टीम ने 23 मार्च को इन कॉलेजों में जांच की। उप विकास आयुक्त कुंदन कुमार समेत अधिकारियों की टीम जब मौके पर पहुंची, तो स्थिति देखकर हैरान रह गई। जांच में सामने आया कि निर्धारित सीटों से कहीं ज्यादा छात्रों का दाखिला लिया गया है।
सीट 300, एडमिशन 400 के पार
- बीबीए में 300 सीट के मुकाबले 411 छात्रों का नामांकन
- बीसीए में 300 सीट के बदले 413 छात्रों का दाखिला
इतनी बड़ी संख्या में अतिरिक्त एडमिशन ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
MBA-MCA में भी डबल गेम
एमबीए और एमसीए कोर्स में भी अलग-अलग विश्वविद्यालयों के नाम पर सीटों का खेल खेला गया।
- एक ओर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से 240 सीट
- दूसरी ओर आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी से 360 सीट
इस तरह एक ही कॉलेज में दो अलग-अलग यूनिवर्सिटी के नाम पर एडमिशन का खेल चलाया गया, जो गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है।
डिग्री के कारोबार का शक
सूत्रों के अनुसार, मामला सिर्फ सीट बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिग्री के अवैध कारोबार से भी जुड़ा हो सकता है। आरोप है कि बिना उचित पढ़ाई के छात्रों को सिर्फ कागजी डिग्री देने का खेल चल रहा है।
प्रशासन सख्त, संबद्धता पर खतरा
जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विश्वविद्यालयों को कॉलेजों की संबद्धता पर पुनर्विचार करने की सिफारिश की है।
फिर उठे पुराने सवाल
वैशाली में पहले भी शिक्षा घोटाले सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह नया मामला एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है—क्या यहां शिक्षा दी जा रही है या सिर्फ डिग्री का व्यापार हो रहा है?
अब देखना होगा कि इस बार प्रशासनिक कार्रवाई कितनी सख्त होती है और क्या इस कथित शिक्षा माफिया पर वास्तव में लगाम लग पाती है या नहीं।















